MDR क्या है और UPI से इसका क्या संबंध?
लगातार बढ़ रहा UPI का इस्तेमाल
दरअसल, UPI के लगातार बढ़ते इस्तेमाल के कारण अब इसके इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सिक्योरिटी और फ्रॉड रोकने पर होने वाले खर्च को लेकर सवाल उठ रहे हैं। UPI अब सिर्फ एक नया पेमेंट सिस्टम नहीं रहा, बल्कि भारत में रोजमर्रा के भुगतान का बड़ा माध्यम बन चुका है। वित्त वर्ष 2025-26 में UPI के जरिए 241.6 अरब ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल वैल्यू करीब ₹314.2 लाख करोड़ रही। अगस्त 2026 तक UPI के 55 करोड़ से ज्यादा यूजर्स थे। अकेले अगस्त में 24.5 अरब ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कीमत करीब ₹29.8 लाख करोड़ रही।
इसी बढ़ते बोझ के बीच सरकार और डिजिटल पेमेंट इंडस्ट्री के सामने यह सवाल है कि UPI के लिए लंबे समय तक सस्टनेबल फंडिंग मॉडल क्या होगा। अगस्त में लोकसभा से पारित कानून ने सरकार को डिजिटल पेमेंट के कुछ तरीकों पर शुल्क तय करने के लिए ज्यादा फ्लेक्सिबिलिटी दी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और पेमेंट काउंसिल ऑफ इंडिया (Payments Council of India) पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि अगर MDR लागू होता है, तो इसका भुगतान ग्राहकों के बजाय व्यापारियों से लिया जाएगा। हालांकि, भविष्य में बड़े UPI ट्रांजैक्शन के लिए किस तरह की फीस तय होगी, इसकी अंतिम तस्वीर अभी साफ नहीं है।
UPI के लिए सस्टनेबल फंडिंग सिस्टम की जरूरत
इंडस्ट्री में कुछ एक्सपर्ट अलग-अलग राशि के हिसाब से 0.3% से 0.5% तक टियर आधारित शुल्क की संभावना जता रहे हैं। लेकिन, यह फिलहाल अनुमान है, इसे सरकार का अंतिम फैसला नहीं माना जाना चाहिए। मार्च 2026 में संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति ने भी UPI के लिए एक सस्टनेबल फंडिंग सिस्टम बनाने की जरूरत बताई थी। समिति का कहना था कि जैसे-जैसे ट्रांजैक्शन बढ़ेंगे, वैसे-वैसे तकनीक, साइबर सुरक्षा, फ्रॉड प्रिवेंशन और सिस्टम की क्षमता बढ़ाने पर निवेश भी जरूरी होगा।
2,000 रुपये के UPI ट्रांजैक्शन पर कोई चार्ज नहीं
गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर 2,000 रुपये के UPI ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगाने जैसी अपवाहें चल रही थीं, जिसका अब सरकार ने खंडन कर दिया है। सरकार ने स्पष्ट किया कि ₹2,000 तक के UPI और RuPay भुगतान पर फिलहाल कोई चार्ज नहीं लगेगा, जो आम ग्राहकों और छोटे व्यापारियों के लिए राहत की बात है। वहीं, ₹2,000 से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर भविष्य में क्या व्यवस्था होगी, इस पर नजर रहेगी। सरकार के सामने चुनौती यह है कि UPI को सस्ता और आसान बनाए रखते हुए उसके तेजी से बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च के लिए ऐसा मॉडल तैयार किया जाए, जिससे ग्राहक और छोटे व्यापारी दोनों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
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