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इंडियन आर्मी ऑपरेशन: जम्मू-कश्मीर के वादियों में आतंक की नई फसल उगाने की कोशिश कर रहे पाकिस्तान समर्थित आतंकियों के लिए साल 2026 काल बनकर आया है. घाटी में कभी आतंक का पोस्टर बॉय रहे बुरहान वानी के नक्शेकदम पर चलकर सोशल मीडिया पर ग्लैमर और दहशत का मेल बनाने का ख्वाब पालने वाले 7 आतंकियों को सुरक्षाबलों ने मात्र 30 दिनों के भीतर मिट्टी में मिला दिया है. किश्तवाड़, उधमपुर और कठुआ के त्रिकोण में सुरक्षाबलों ने ऑपरेशन ऑल आउट के तहत जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया है, जिससे सीमा पार बैठे आकाओं में खलबली मच गई है.
किश्तवाड़ में जैश कमांडर सैफुल्लाह को सेना ने मार गिराया है. सैफुल्लाह पाकिस्तानी नागरिक है, जो घुसपैठ करके भारत आया था. वह घाटी में कई हमलों के लिए वांटेड था. वह भारत में ओवर ग्राउंड वर्कर की भर्ती करने के लिए जाना जाता था. भारत में रहते हुए वह पाकिस्तान के लगातार संपर्क में था. यहींं नहीं सातों आतंकी आपस में संपर्क में थे. सैफुल्लाह अपने साथी आदिल की मौत के बाद किश्तवाड़ से कश्मीर जाने की फिराक में था. हालांकि, उससे पहले ही मारा गया.

सिर्फ उस्मान ही नहीं, बल्कि उधमपुर क्षेत्र में भी आतंक के दो बड़े चेहरों, अबू मावी और ज़ुबैर का खात्मा कर दिया गया. ये दोनों आतंकी उधमपुर के पहाड़ी इलाकों में छिपकर बड़े हमले की साजिश रच रहे थे, लेकिन सुरक्षाबलों की पैनी नजर से वे बच नहीं सके. इन ऑपरेशनों में सुरक्षाबलों ने जिस तरह का समन्वय दिखाया है, उससे आतंकियों के भागने के सारे रास्ते बंद हो गए थे.

इन सात आतंकियों के खात्मे के साथ ही सुरक्षाबलों ने भारी मात्रा में हथियार, अत्याधुनिक गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री भी बरामद की है. जांच एजेंसियों के मुताबिक, ये आतंकी बुरहान वानी की तरह ही युवाओं के बीच अपनी पैठ बनाने के लिए हथियारों के साथ तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने की योजना बना रहे थे. लेकिन वे अपने मंसूबों में कामयाब होते, उससे पहले ही सुरक्षाबलों ने उनके पूरे नेटवर्क का ‘पोस्टमॉर्टम’ कर दिया. ये आदिल की पुरानी तस्वीर है.
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किश्तवाड़ में करीब 10 दिन पहले यहां जैश का आतंकी आदिल मारा गया था, जो कई पुरानी आतंकी घटनाओं में शामिल रहा था. वहीं आज की ताजा मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने तीन और आतंकियों को ढेर कर दिया, जिनमें जैश का एक और बड़ा कमांडर सैफुल्लाह भी शामिल बताया जा रहा है. किश्तवाड़ के जंगलों में चलाए गए इस सटीक ऑपरेशन ने आतंकियों के हौसले पस्त कर दिए हैं.

इस एक महीने के भीतर जैश-ए-मोहम्मद को सबसे बड़ा झटका लगा है. उसके दो कुख्यात कमांडर मारे गए. इनमें सबसे बड़ा नाम ‘उस्मान’ का था, जो जैश का खूंखार कमांडर था और 23 जनवरी को कठुआ में सुरक्षाबलों के हत्थे चढ़ गया. उस्मान न केवल स्थानीय भर्ती का जिम्मा संभालता था, बल्कि वह सीमा पार से घुसपैठ करने वाले आतंकियों के लिए लॉन्चिंग पैड भी तैयार करता था. उसके मारे जाने से जैश की रीढ़ पूरी तरह टूट गई है.

सुरक्षा बल संबंधित क्षेत्रों में सघन तलाशी अभियान (Search Operation) चला रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि यह तो बस शुरुआत है; आतंकियों के सहयोगियों (OGW) और उनके मददगारों की सूची तैयार कर ली गई है. जम्मू-कश्मीर से आतंक के इस कैंसर को जड़ से उखाड़ने के लिए सेना अब उन गुप्त ठिकानों पर प्रहार कर रही है, जहां कभी आतंकी खुद को सुरक्षित महसूस करते थे.
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