Middle East Conflict: मिडिल ईस्ट की जंग की आंच भारत तक आई है. यहां पिछले कुछ दिनों में तीन जहाजों पर अमेरिका ने हमला किया है. इसमें तीन भारतीय मारे गए हैं. इसके अलावा मिडिल ईस्ट में लगातार शांति समझौते पर सस्पेंस बना हुआ है. लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सरकार से सवाल किया है. इसे पर हमने एक्सपर्ट्स से राय ली, आखिर सरकार को इस मामले में क्या कदम उठाने चाहिए. साथ ही मिडिल ईस्ट में फिलहाल क्या स्थिति है?
दिल्ली यूनिवर्सिटी के रिटायर्ड पॉलिटिकल साइंस के प्रोफेसर सुब्रत मुखर्जी ने एबीपी डिजिटल के साथ बात करते हुए बताया कि अभी जो हाल में हुआ है, जिसमें तीन हिन्दुस्तानी लोग मारे गए हैं. यह इंटरनेशनल कानून के तहत के गलत है. अभी तक इसको लेकर किसी भी तरह की एक्सप्लेनेशन नहीं आया है.
उन्होंने कहा कि जीवन का क्षति की पूर्ति तो एकदम से नहीं होती है, लेकिन उनके परिवार के लिए कुछ न कुछ तुरंत करना चाहिए और भारत सरकार को भी अमेरिका से पूछना चाहिए, यह जो हुआ है, आपने क्यों किया? इस पर पूरा बयान लिया जाना चाहिए और ध्यान रखना चाहिए, कि यह भविष्य में न हो. यह बहुत जरूरी है. क्योंकि यह छुटपुट घटना होती हैं, हम भूल जाते हैं. यह सही बात नहीं है. हम लोगों को पूरा स्टैंड लेना है. यह गलत हुआ है. इसके लिए आपको यानी अमेरिका को विस्तारपूर्वक बताना चाहिए. साथ ही एक दस्तावेज लेना चाहिए, जिसपर भविष्य में इस तरह की घटना न हो. अगर ऐसा नहीं होता है तो हम स्थिति को सामान्य नहीं मान सकते.
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इसके प्रभाव क्या हैं?
यह छुटपुट घटना तो रोज चल रही है. हम देख रहे हैं, कि कभी अमेरिका कुछ बोलता है, कभी ईरान कुछ बोलता है. यह बहुत ही Uncertain Situation है. फिर भी इस स्थिति में अन्य देशों की सुरक्षा भी तुरंत देना चाहिए. क्योंकि जंग तो दो देश के बीच में हैं. लेकिन बाकी लोग जो रोजी रोजगार के लिए उधर गए हैं, उनके लिए कुछ तो सिक्योरिटी होना चाहिए. यह स्थिति अस्वीकार्य है. जो लॉ ऑफ वॉर यानी इंटरनेशनल कानून है, उसके बिल्कुल विपरित है.
इंटरनेशनल जांच होना चाहिए
इधर ट्रंप के इस हमले से इनकार के बाद कोई भी देश इसकी जिम्मेदारी नहीं ले रहा है. तो फिर एक इन्क्वायरी की जाना चाहिए. हम करें, या यूनाइटेड नेशन करे. देखना होगा, कि जिम्मेदारी किसकी है. देखना पड़ेगा किसने किया. एक अंतर्राष्ट्रीय इन्क्वायरी हो, इससे पता चल जाएगा, यानी दूध का दूध पानी हो जाएगा.
युद्ध कि स्थिति पर उन्होंने बताया कि फिलहाल स्थिति साफ नहीं है. ऐसे में यह ज्यादा दिन नहीं चल सकता. कुछ तो एग्रीमेंट ईरान के साथ अमेरिका को करना पड़ेगा.
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