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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए विपक्ष नया नोटिस का मसौदा तैयार कर रहा है।
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए विपक्ष एक बार फिर कोशिश में जुटा है। सूत्रों के अनुसार, कई विपक्षी दलों के नेता आपस में बातचीत कर रहे हैं।
करीब पांच सीनियर लीडर एक नए नोटिस का मसौदा तैयार करने पर काम कर रहे हैं, ताकि हटाने की कार्यवाही शुरू की जा सके। इससे पहले मार्च में विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए संसद में नोटिस दिया था।
हालांकि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन ने इन नोटिसों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लगाए गए आरोप उन्हें हटाने के लिए आवश्यक उच्च संवैधानिक मानदंडों को पूरा नहीं करते।
विपक्ष ने 200 हस्ताक्षर हासिल करने का लक्ष्य रखा
नए नोटिस में विपक्ष कम से कम 200 सांसदों का समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है। इसकी बड़ी वजह हाल ही में लोकसभा में गिरा महिला आरक्षण संशोधन बिल है। लोकसभा में शुक्रवार को संविधान में 131वां संशोधन बिल वोटिंग के बाद गिर गया। बिल के खिलाफ 230 सांसदों ने वोट डाला था।

नियम के अनुसार 100 सांसदों के दस्तखत जरूरी
लोकसभा में CEC को हटाने के प्रस्ताव के लिए कम से कम 100 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं। राज्यसभा में इसके लिए कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं।

कानून के अनुसार प्रस्ताव मंजूर होने पर ही जांच समिति
मुख्य चुनाव आयुक्त को उसी तरीके से हटाया जा सकता है जैसे सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाया जाता है। अन्य चुनाव आयुक्तों को हटाने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त की सिफारिश जरूरी होती है।
जजेज (इन्क्वायरी) एक्ट 1968 के अनुसार, अगर दोनों सदनों में एक ही दिन नोटिस दिया जाता है, तो जांच समिति तभी बनेगी जब दोनों सदनों में प्रस्ताव स्वीकार कर लिया जाएगा। इसके बाद लोकसभा स्पीकर और राज्यसभा चेयरमैन मिलकर एक संयुक्त जांच समिति बनाएंगे।
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