इतिहास गवाह है कि युद्ध वही जीतता है जिसकी तैयारी दुश्मनों की नजरों से ओझल होती है। विशाखापटनम के शांत तटों के पीछे पहाड़ों को काटकर एक ऐसा पाताल लोक बनाया जा रहा है जिसकी कल्पना मात्र से ही बीजिंग के रक्षा मंत्रालय में खलबली मच गई है। इसे नाम दिया गया है आईएएस वर्षा। यह भारत की वो अदृश्य तलवार है जो समुद्र की गहराई से सीधे दुश्मनों की गर्दन पर वार करेगी। कल्पना कीजिए कि एक परमाणु पनडुब्बी समुद्र की सतह पर आए बिना सीधे एक पानी के नीचे बनी सुरंग से पहाड़ों के अंदर दाखिल हो जाती है। ऊपर से देखने वाले किसी भी जासूसी सेटेलाइट को सिर्फ एक पहाड़ दिखेगा। लेकिन उसके अंदर भारत के समुद्री शिकारी यानी कि न्यूक्लियर सबमरीन युद्ध के लिए तैयार हो रहे होंगे। परमाणु सुरक्षा का किला बनना। यहां सिर्फ पनडुबियां नहीं रहेंगी बल्कि परमाणु हथियारों का रखरखाव और स्टोरेज भी अत्यंत सुरक्षित कंक्रीट के चेंबर्स में होगा।
इसे भी पढ़ें: शक्ति, मजबूती और अटल संकल्प…नौसेना में शामिल हुआ महाविनाशक INS महेंद्रगिरी
यह बेस इतना मजबूत बनाया जा रहा है कि इस पर परमाणु हमले का भी असर नहीं होगा।
इस प्रोजेक्ट का नाम सुनते ही चीनी मीडिया भड़क उठता है। इसकी तीन बड़ी वजह भी हैं। पहली वजह है निगरानी की नाकामी। चीन की पूरी रणनीति भारत की पनडुबियों को ट्रैक करने पर टिकी हुई है। आईएएस वर्षा इस ट्रैकिंग को नामुमकिन बना देगा। जब दुश्मन को पता ही नहीं होगा कि पनडुब्बी बेस के अंदर है या समुद्र में गश्त पर तो उसका पूरा डिफेंस सिस्टम अंधा हो जाएगा। दूसरी बड़ी वजह है बंगाल की खाड़ी में भारत का बढ़ता हुआ वर्चस्व। अब तक चीन को लगता था कि कि वो स्टेट ऑफ मलाका से निकलकर हिंद महासागर में अपनी दादागिरी चला लेगा। लेकिन आईएएस वर्षा के साथ भारत ने अपनी रणनीतिक गहराई को इतना बढ़ा लिया है कि बंगाल की खाड़ी अब चीन के लिए नो गो जोन बनने जा रही है। चीन के अंदर वेट एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस बेस से सबसे ज्यादा खतरा उन मिसाइलों से है जो यहां से निकलेंगी। भारत की अरिहंत क्लास की पनडुब्बी जब K4 यानी कि 3500 किमी वाली और भविष्य की K5 5000 किमी से भी ज्यादा की रेंज से लैस मिसाइल होगी। उसको लेकर आईएएस वर्षा से निकलेगी। तो पूरा चीन उसकी रेंज में होगा।
इसे भी पढ़ें: INS Mahendragiri कमीशनिंग: Rajnath Singh बोले, Andhra Pradesh बन रहा देश का डिफेंस Powerhouse
पहले हमारी पनडुब्बियों को दुश्मन के करीब जाना पड़ता था जिससे उनके पकड़े जाने का खतरा रहता था। लेकिन अब आईएएस वर्षा के पास सुरक्षित रहते हुए भी भारत दुश्मन के किसी भी शहर को निशाना बना सकता है। यह डिस्टेंस और डिस्ट्रक्शन का वो कॉम्बिनेशन है जिसका चीन के पास कोई जवाब नहीं है। चीन इस बेस की काट ढूंढने के लिए छटपटा रहा है। वो म्यांमार में पैर पसार रहा है ताकि भारत की हर हलचल पर नजर रह सके। व हिंद महासागर में अपने युवान वांग जैसे जासूसी जहाज भेज रहा है ताकि समुद्र के पानी का तापमान और नमक माप सके। यह डाटा पनडुब्बियों को खोजने में काम आता है। लेकिन भारत ने आईएएस वर्षा को साइलेंट मोड पर डालकर चीन के अरबों डॉलर के जासूसी नेटवर्क को बर्बाद कर दिया।
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.