वेनेजुएला में आए दो भीषण भूकंपों ने पूरे देश में भारी तबाही मचाई हैं। कई इमारतें क्षतिग्रस्त हुई हैं, सड़क और सार्वजनिक ढांचे को नुकसान पहुंचा हैं तथा राहत और बचाव कार्य लगातार जारी हैं। इस प्राकृतिक आपदा के बीच अब दुनिया की नजर वेनेजुएला के तेल उद्योग पर भी टिक गई हैं, क्योंकि यह देश दुनिया के बड़े कच्चे तेल उत्पादकों में शामिल हैं। मौजूद जानकारी के अनुसार, यदि आने वाले दिनों में तेल उत्पादन या निर्यात प्रभावित होता हैं तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार के साथ-साथ भारत पर भी पड़ सकता हैं।
बता दें कि पिछले कुछ महीनों में भारत ने वेनेजुएला से कच्चे तेल का आयात काफी बढ़ाया है। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और होरमुज स्ट्रेट से जुड़े जोखिमों के कारण भारत ने अपनी ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने की रणनीति अपनाई थी। इसी के तहत वेनेजुएला भारत के लिए एक महत्वपूर्ण तेल आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान जहां वेनेजुएला से औसत मासिक आयात लगभग 64 हजार मीट्रिक टन था, वहीं अप्रैल और मई 2026 में यह बढ़कर 10 लाख मीट्रिक टन से अधिक पहुंच गया हैं। गौरतलब है कि वेनेजुएला का भारी कच्चा तेल भारतीय रिफाइनरियों के लिए उपयुक्त माना जाता हैं और सार्वजनिक क्षेत्र के साथ निजी कंपनियां भी इसका प्रसंस्करण करने में सक्षम हैं।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह हैं कि क्या भूकंप से तेल उत्पादन और निर्यात से जुड़ा बुनियादी ढांचा प्रभावित हुआ हैं। अभी तक सामने आई जानकारी के अनुसार किसी बड़े तेल शोधन संयंत्र, पाइपलाइन या निर्यात बंदरगाह को व्यापक नुकसान की पुष्टि नहीं हुई हैं। शुरुआती रिपोर्टों में संकेत मिले हैं कि भूकंप का सबसे अधिक असर आवासीय इलाकों, परिवहन व्यवस्था और सार्वजनिक सुविधाओं पर पड़ा हैं। हालांकि औद्योगिक परिसरों का विस्तृत निरीक्षण अभी जारी है।
विशेषज्ञों का मानना हैं कि बड़े भूकंप के बाद तेल भंडारण केंद्रों, पाइपलाइनों और बंदरगाहों की विस्तृत तकनीकी जांच की जाती हैं। कई बार शुरुआती दौर में नुकसान दिखाई नहीं देता, लेकिन बाद की जांच में संरचनात्मक खामियां सामने आ सकती हैं। इसलिए अगले कुछ दिन काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे है।
जहां तक भारत का सवाल हैं, फिलहाल किसी तत्काल ईंधन संकट की आशंका नहीं हैं। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल रूस, इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका, ब्राजील और अफ्रीकी देशों सहित 35 से अधिक देशों से आयात करता हैं। इसके अलावा तेल कंपनियां पर्याप्त भंडार भी बनाए रखती हैं, जिससे आपूर्ति में अस्थायी बाधा आने पर स्थिति को संभाला जा सके।
हालांकि यदि वेनेजुएला से लंबे समय तक तेल निर्यात प्रभावित होता हैं और उसी दौरान पश्चिम एशिया में भी आपूर्ति संबंधी चुनौतियां बनी रहती हैं तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसका असर भारत के आयात बिल, मुद्रास्फीति और सरकारी वित्तीय प्रबंधन पर भी देखने को मिल सकता हैं।
गौरतलब है कि भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 85 से 90 प्रतिशत आयात करता हैं। ऐसे में वैश्विक बाजार में कीमतों में मामूली बढ़ोतरी भी देश की अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकती हैं। हालांकि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में तत्काल बदलाव की संभावना नहीं मानी जा रही हैं क्योंकि इनके निर्धारण में अंतरराष्ट्रीय कीमतों के अलावा विनिमय दर, कर व्यवस्था और तेल विपणन कंपनियों के फैसले भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मौजूद जानकारी के अनुसार, वेनेजुएला में राहत कार्यों के साथ-साथ तेल उत्पादन केंद्रों, पाइपलाइनों और निर्यात टर्मिनलों की जांच जारी हैं। यदि आने वाले दिनों में वहां से तेल आपूर्ति सामान्य बनी रहती हैं तो भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर कोई तत्काल खतरा नहीं रहेगा। लेकिन यदि नुकसान अपेक्षा से अधिक सामने आता हैं तो भारत को अपनी वैकल्पिक आयात रणनीति पर फिर से तेजी से काम करना पड़ सकता हैं।
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