विश्व कप की शुरुआत में सारी निगाहें गौतम गंभीर पर टिकी थीं. गंभीर उन शख्सियतों में से हैं जिनके बारे में लोगों की राय बेहद बंटी हुई रहती है या तो आप उन्हें बेहद पसंद करते हैं या बिल्कुल नहीं. लेकिन एक बात तय है कि वह कठिन फैसले लेने से कभी नहीं डरते और अपने हर निर्णय की जिम्मेदारी खुद उठाते हैं. अगर कोई फैसला गलत भी हो जाए तो वह कप्तान या किसी और पर दोष नहीं मढ़ते. वर्षों से यही उनका स्वभाव रहा है.
फैसला लिया तो डटे रहे
गंभीर के दृढ़ निश्चय का सबसे बड़ा उदाहरण अभिषेक शर्मा का मामला है. गंभीर ने लगातार उनका समर्थन किया, जबकि उस समय आम राय इसके खिलाफ थी. अगर फाइनल में भी अभिषेक शर्मा असफल हो जाते, तो गंभीर को भारी आलोचना झेलनी पड़ सकती थी. लेकिन यही गंभीर की शैली है वे अपने फैसलों पर डटे रहते हैं. फाइनल में अभिषेक का सिर्फ 19 गेंदों में लगाया गया अर्धशतक जितना उनके लिए खास था, उतना ही गंभीर के भरोसे की जीत भी था.गंभीर अच्छी तरह जानते थे कि अभिषेक शर्मा शीर्ष क्रम में करीब 195 के स्ट्राइक रेट से रन बनाते हैं. यह सच है कि ऐसे आक्रामक बल्लेबाज कभी-कभी जल्दी आउट भी हो सकते हैं, लेकिन जिस दिन उनका बल्ला चल जाता है, वे मैच की दिशा ही बदल देते हैं. किसी खिलाड़ी को इस तरह खेलने के लिए आत्मविश्वास और खुली छूट चाहिए होती है, और यही भरोसा गंभीर ने दिया.
कोच की सोच और बोझ
हेड कोच ने संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा दोनों को यह भरोसा दिलाया कि दो-चार खराब पारियों के बाद उनकी जगह पर कोई खतरा नहीं आएगा. परिणाम यह हुआ कि दोनों बल्लेबाज बेखौफ होकर खेले. चाहे किसी को पसंद आए या नहीं, यह गंभीर का निर्णायक फैसला था जिसने भारत के टी20 खेलने के तरीके को नई दिशा दी और अंततः भारत को खिताब दिलाया.
फ्यूचर पर पैसला
अब सवाल यह है कि भारत के मुख्य कोच के रूप में गंभीर का अगला लक्ष्य क्या होगा? क्या वह अब 2027 के वनडे विश्व कप पर ध्यान केंद्रित करेंगे? याद रखें कि उन्होंने सिर्फ दो साल के भीतर चैंपियंस ट्रॉफी, एशिया कप और टी20 विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट भारत को जिताए हैं. लाल गेंद के क्रिकेट में भले ही गंभीर पूरी तरह सफल नहीं रहे हों, लेकिन सीमित ओवरों के क्रिकेट में उनका रिकॉर्ड शानदार रहा है. फरवरी 2025 में भारत ने घर पर इंग्लैंड की मजबूत व्हाइट-बॉल टीम को हराकर जिस तरह जीत हासिल की, उसने चैंपियंस ट्रॉफी की नींव रखी. उस टूर्नामेंट में भारत ने बिना ज्यादा संघर्ष के खिताब जीत लिया.
टी-20 की सबसे खतरनाक टीम
भारत ने ऑस्ट्रेलिया, पाकिस्तान और न्यूजीलैंड जैसी मजबूत टीमों को आसानी से हराया, जो एक शानदार उपलब्धि थी. इसके बाद एशिया कप में भी भारत ने जीत हासिल की और इस सफलता का चरम अहमदाबाद में खेले गए फाइनल में देखने को मिला. गंभीर की पहचान हमेशा उनकी लड़ाकू प्रवृत्ति से रही है. वह दबाव से घबराने वालों में से नहीं हैं और आलोचनाओं से भी उन्हें फर्क नहीं पड़ता. टेस्ट क्रिकेट में भारत के खराब प्रदर्शन को लेकर उन्हें काफी आलोचना झेलनी पड़ी, लेकिन दबाव में टूटना उनकी फितरत नहीं है. इसके बजाय उन्होंने उसी प्रारूप पर ध्यान दिया जिसने उन्हें भारत का मुख्य कोच बनाया और ऐसी टीम तैयार की जो अपने दिन पर लगभग अजेय है.
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मिली हार टीम के लिए एक चेतावनी की तरह थी. इसके बाद अचानक संजू को फिर से ओपनिंग में भेजा गया और तिलक वर्मा को मिडिल ऑर्डर में मौका मिला. ये दोनों फैसले पूरी तरह सफल रहे. गंभीर की कोचिंग में भारत ने 2024 में रोहित और राहुल द्रविड़ के नेतृत्व में जीते गए टी20 विश्व कप खिताब को सफलतापूर्वक डिफेंड किया. और ऐसा करने वाली भारत पहली टीम बनी.
और हां, एक और खास उपलब्धि भी गंभीर के नाम दर्ज हो गई. वह दुनिया के पहले और इकलौते ऐसे क्रिकेटर बन गए हैं जिन्होंने एक खिलाड़ी और कोच दोनों के रूप में व्हाइट-बॉल विश्व कप खिताब जीता है. उनके आलोचकों के लिए यह आंकड़ा पचाना शायद थोड़ा मुश्किल होगा.
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