UPSC Success Story: किसान की बेटी प्रिया रानी ने बेंगलुरु की हाई-सैलरी जॉब छोड़कर दिल्ली में UPSC की तैयारी की। ऑल इंडिया 69वीं रैंक पाकर वे सासाराम की नई SDM बनी हैं।
किसान परिवार से नाता और शानदार पढ़ाई
प्रिया रानी मूल रूप से बिहार की राजधानी पटना के फुलवारी शरीफ स्थित कुरकुरी गांव की रहने वाली हैं। उनके पिता एक किसान हैं और माता गृहणी हैं। घर की आर्थिक परिस्थितियां सामान्य होने के बावजूद उनके माता-पिता ने उनकी शिक्षा में कभी कोई कमी नहीं आने दी। प्रिया शुरू से ही पढ़ाई में अव्वल रहीं। स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने रांची के प्रसिद्ध संस्थान बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (BIT) से इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बी.टेक (B.Tech) की डिग्री हासिल की।
लाखों के पैकेज वाली नौकरी छोड़ी, दिल्ली जाकर की यूपीएससी की तैयारी
इंजीनियरिंग पूरी होते ही प्रिया रानी का चयन बेंगलुरु की एक बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी में हो गया, जहां उन्हें काफी शानदार सैलरी पैकेज मिल रहा था। हालांकि, उनके मन में तो देश और समाज की सेवा करने का सपना पल रहा था। उन्होंने बड़ा जोखिम उठाते हुए अपनी हाई-पेइंग नौकरी छोड़ दी और संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की तैयारी के लिए दिल्ली का रुख किया।
लगातार दो बार UPSC क्रैक कर रचा इतिहास
प्रिया रानी का संकल्प इतना मजबूत था कि उन्होंने पहले ही प्रयास में यूपीएससी 2021 की परीक्षा में 284वीं रैंक हासिल की। इसके आधार पर उन्हें इंडियन डिफेंस एस्टेट्स सर्विस (IDES) अलॉट हुई। लेकिन उनका असली लक्ष्य तो आईएएस (IAS) बनना था। उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी तैयारी जारी रखी। आखिरकार UPSC 2023 की परीक्षा में उन्होंने ऑल इंडिया 69वीं रैंक (AIR 69) लाकर अपना सपना सच कर दिखाया और उन्हें बिहार कैडर मिला।
पहली पोस्टिंग और प्राथमिकताएं
सासाराम की एसडीएम के रूप में अपनी पहली मुख्य पोस्टिंग मिलने के बाद प्रिया रानी ने तुरंत एक्शन मोड में काम शुरू कर दिया। उन्होंने साफ किया कि एसडीएम ऑफिस में आने वाले हर फरियादी की बात संवेदनशीलता से सुनी जाएगी। पारदर्शी प्रशासन, बेहतर कानून-व्यवस्था और सरकारी योजनाओं को धरातल पर पहुंचाना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। हाल ही में उन्होंने पदभार संभालने के बाद उन्होंने कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय का औचक निरीक्षण कर छात्राओं की शिक्षा और भोजन की गुणवत्ता की जांच भी की। प्रिया रानी का यह सफर साबित करता है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो गांव-देहात से निकलकर भी बड़े से बड़ा मुकाम हासिल किया जा सकता है।
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