क्या है सीजनल फटीग? (what is seasonal fatigue)
टीओआई में छपी एक खबर के अनुसार, सीजनल फटीग को मौसमी थकान भी कहते हैं. जब कोई मौसम बदलता है मुख्य रूप से सर्दियों का मौसम तो शरीर में ऊर्जा की कमी, कमजोरी, थकान जैसी स्थिति महसूस होती है, इसे ही सीजनल फटीग कहा जाता है. कई बार आप कितना भी आराम करें, फिर भी ये ठीक नहीं होता. कई बार दिनचर्या भी प्रभावित होने लगती है. सीजनल फटीग से ग्रस्त व्यक्ति को नींद न आने की समस्या, मानसिक थकान, सुस्ती, ध्यान और एकाग्रता में कमी महसूस कर सकता है.
दूसरे शब्दों में कहें तो मौसमी थकान किसी को तब होती है, जब आपका शरीर रोशनी और तापमान पर आपकी अपेक्षा से कहीं अधिक प्रतिक्रिया करता है. इस मौसम में नेचुरल प्रकाश कम मिलता है, जिसका असर आपकी सेहत पर पड़ता है. जब मौसम बदल कर वसंत ऋतु आती है तो उजाला काफी देर तक शाम में भी रहता है, ऐसे में बॉडी को एडजस्ट करने में समय लग सकता है.
सीजनल फटीग के कारण
मौसमी थकान कई बार धूप की कमी, पोषण की कमी से भी होता है. सर्दियों में चूंकि धूप अधिक नहीं निकलती है, जिससे सेरोटोनिन, मेलाटोनिन हॉर्मन का बैलेंस बिगड़ जाता है. इससे भी थकान होने लगती है. धूप न होने के कारण विटामिन डी शरीर को नहीं मिलता है, इससे भी थकान, उदासी के लक्षण नजर आ सकते हैं. साथ ही सिरदर्द, बदन दर्द, मसल्स पेन, नींद न आने की परेशानी भी देखी जा सकती है.
डॉक्टर से कब करें संपर्क
टीओआई में छपी एक खबर के अनुसार, यदि सीजनल फटीग आपको चार से छह सप्ताह तक बना रहे और धीरे-धीरे स्थिति खराब होती जाए. कुछ लोगों को वजन कम होने लगता है या बढ़ने लगता है, ऐसे में आप अलर्ट हो जाएं. मूड खराब रहे, किसी भी चीज में मन ना लगे, रुचि कम होना, नींद न आना जैसे लक्षणों को भी इग्नोर न करें. कुछ लोगों के बाल अधिक झड़ते हैं, महिलाओं में पीरियड्स अनियमित होने की संभावना भी बढ़ जाती है.
क्या करें
ये सभी लक्षण दिखें तो एक बार डॉक्टर से मिल लें. हेल्दी लाइफस्टाइल फॉलो करें. रात में जल्दी सोने की कोशिश करें ताकि नींद पूरी हो. इससे सुबह आलस, सुस्ती, थकान महसूस नहीं होगी. सर्दियां खत्म होने के दौरान थकान महसूस करना कोई रोग नहीं, बल्कि एक अस्थायी समस्या है, जो ठीक हो जाती है.
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