मंत्रालय ने भारतीय ओलंपिक संघ से कहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय टेबल टेनिस महासंघ से सलाह लेकर अंतरिम प्रशासनिक व्यवस्था तैयार करे। इसके लिए एक अंतरिम समिति बनाई जाएगी, जो महासंघ की नियमित व्यवस्था बहाल होने तक खेल से जुड़े जरूरी काम देखेगी।
गौरतलब है कि भारतीय टेबल टेनिस महासंघ की अध्यक्ष मेघना अहलावत हैं। वह महासंघ की पहली महिला अध्यक्ष हैं और दिसंबर 2022 में उन्होंने पद संभाला था। मेघना अहलावत हरियाणा के विधायक दुष्यंत चौटाला की पत्नी हैं। उनके ससुर अजय सिंह चौटाला भी पहले महासंघ के अध्यक्ष रह चुके हैं।
महासंघ पिछले कुछ महीनों से लगातार विवादों में रहा है। जनवरी में महासंघ ने अपने महासचिव और पूर्व खिलाड़ी कमलेश मेहता को कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के चलते निलंबित कर दिया था। कमलेश मेहता ने इस फैसले को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी। अदालत ने बाद में उनका निलंबन रद्द कर दिया। इस पूरे मामले को महासंघ के भीतर चल रहे सत्ता संघर्ष से भी जोड़कर देखा गया, हालांकि महासंघ ने इससे इनकार किया था।
खिलाड़ियों से जुड़े फैसलों को लेकर भी महासंघ की आलोचना हुई है। स्टार खिलाड़ी मनिका बत्रा को एशियाई खेलों की टीम में जगह नहीं मिली थी। इसके पीछे घरेलू मुकाबलों में जरूरी भागीदारी नहीं होने का कारण बताया गया था। मनिका बत्रा ने सार्वजनिक रूप से इस फैसले पर सवाल उठाए और खेल मंत्रालय से हस्तक्षेप की मांग की थी। उन्होंने चयन प्रक्रिया को अस्पष्ट और अनुचित बताया था।
बता दें कि मंत्रालय ने राष्ट्रीय चैंपियनशिप के आयोजन में हुई देरी को भी खिलाड़ियों के हितों से जुड़ी गंभीर समस्या माना है। मंत्रालय का कहना है कि राष्ट्रीय खेल महासंघों से जवाबदेही, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक तरीके से काम करने की उम्मीद की जाती है, लेकिन टेबल टेनिस महासंघ इन मानकों पर खरा नहीं उतर पाया।
यह पहली बार नहीं है जब महासंघ को प्रशासनिक विवाद का सामना करना पड़ा है। फरवरी 2022 में भी दिल्ली उच्च न्यायालय ने मनिका बत्रा की याचिका के बाद महासंघ को निलंबित कर दिया था। मामला उस चयन नीति से जुड़ा था, जिसके चलते मनिका को उस साल की एशियाई चैंपियनशिप के लिए टीम से बाहर कर दिया गया था। अदालत ने उस समय महासंघ की स्थिति पर कड़ी टिप्पणी करते हुए प्रशासक नियुक्त करने का आदेश दिया था।
इसके बाद दिसंबर 2022 में नए चुनाव हुए और महासंघ की व्यवस्था बहाल हुई। लेकिन अब समय पर चुनाव नहीं होने और लगातार सामने आ रही प्रशासनिक समस्याओं के कारण एक बार फिर सरकारी हस्तक्षेप हुआ है। मंत्रालय ने साफ किया है कि खेल की नियमित और जवाबदेह व्यवस्था बहाल होने तक अंतरिम समिति के जरिए कामकाज चलाया जाएगा। ऐसे में अब नजर इस बात पर रहेगी कि महासंघ में नए चुनाव कब होते हैं और खिलाड़ियों के हितों को ध्यान में रखते हुए स्थायी प्रशासनिक व्यवस्था कितनी जल्दी बहाल होती है।
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