यही वजह है कि देर रात तक फोन चलाने वाले लोगों को नींद आने में देर लगती है, नींद बार-बार टूटती है और सुबह उठने पर थकान बनी रहती है. अच्छी बात यह है कि कुछ आसान आदतें अपनाकर इस समस्या को काफी हद तक ठीक किया जा सकता है.
स्क्रीन की नीली रोशनी नींद को कैसे बिगाड़ती है
जब हम मोबाइल या लैपटॉप देखते हैं, तो उसकी स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी सीधे आंखों के जरिए दिमाग तक पहुंचती है. दिमाग इसे दिन की रोशनी जैसा समझता है और शरीर की जैविक घड़ी गड़बड़ा जाती है. इससे मेलाटोनिन हार्मोन का बनना धीमा हो जाता है. यही हार्मोन शरीर को नींद के लिए तैयार करता है.
इस असर के कारण अक्सर ये समस्याएं दिखती हैं:
-सोने में ज्यादा समय लगना
-रात में बार-बार जागना
-सुबह भारीपन और थकान
-दिनभर चिड़चिड़ापन या ध्यान की कमी
ज्यादा स्क्रीन टाइम से होने वाले लंबे नुकसान
रोज रात को देर तक स्क्रीन देखने की आदत सिर्फ नींद ही नहीं, पूरे स्वास्थ्य पर असर डालती है. धीरे-धीरे शरीर की प्राकृतिक दिन-रात लय बिगड़ने लगती है. इससे कई दिक्कतें जुड़ सकती हैं:
-इम्युनिटी कमजोर होना
-वजन बढ़ना
-दिल से जुड़ी समस्याओं का खतरा
-याददाश्त और ध्यान पर असर
-मानसिक थकान और तनाव
हेल्थ एक्सपर्ट भी मानते हैं कि सोने से पहले स्क्रीन से दूरी बनाना गहरी नींद के लिए सबसे असरदार कदम है.
सोने से 1 घंटे पहले अपनाएं ये सुकून देने वाली आदतें
1. स्क्रीन बंद करने का तय समय रखें
रोज सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल, टीवी और लैपटॉप बंद कर दें. इसे रोज का नियम बनाएं, ताकि दिमाग को संकेत मिले कि अब आराम का समय है.
2. हल्की रोशनी वाला माहौल बनाएं
तेज सफेद रोशनी की जगह हल्की पीली रोशनी रखें. इससे शरीर को रात का संकेत मिलता है और नींद का हार्मोन बनना आसान होता है.
3. किताब या मैगजीन पढ़ें
सोने से पहले हल्की-फुल्की पढ़ाई मन को शांत करती है. यह दिमाग को स्क्रीन से हटाकर आराम की स्थिति में लाती है.
4. धीमा संगीत या ध्यान
सॉफ्ट म्यूजिक, मंत्र या ध्यान जैसी गतिविधियां तनाव कम करती हैं. सांस पर ध्यान देने से दिल की धड़कन धीमी होती है और शरीर रिलैक्स होता है.
5. हल्की स्ट्रेचिंग या रिलैक्स एक्सरसाइज
गर्दन, कंधे और पीठ की हल्की स्ट्रेचिंग दिनभर की जकड़न कम करती है. इससे शरीर को आराम का संकेत मिलता है और नींद आसान होती है.
6. सोने-जागने का समय तय रखें
हर दिन लगभग एक ही समय पर सोएं और उठें. इससे शरीर की नींद की लय स्थिर रहती है और नींद खुद-ब-खुद आने लगती है.
7. रात में कैफीन और भारी भोजन से दूरी
चाय, कॉफी या ज्यादा मसालेदार खाना रात में लेने से नींद प्रभावित होती है. सोने से कम से कम 2-3 घंटे पहले हल्का भोजन लें.
बेहतर नींद के लिए छोटे लेकिन असरदार बदलाव
नींद कोई स्विच नहीं है जिसे बटन दबाते ही चालू किया जा सके. यह शरीर की प्राकृतिक प्रक्रिया है, जो सही माहौल और आदतों से मजबूत होती है. रात को स्क्रीन से दूरी, शांत माहौल और नियमित दिनचर्या-ये तीन चीजें नींद सुधारने की सबसे मजबूत नींव हैं.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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