प्रयागराज महाकुंभ के दौरान सुर्खियों में आईं पूर्व मॉडल और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हर्षा रिछारिया संन्यास ग्रहण कर चुकी हैं। 19 अप्रैल को उज्जैन स्थित मौनी तीर्थ आश्रम में पंचायती निरंजनी अखाड़ा के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी सुमनानंद गिरि महाराज से उन्होंने दीक्षा ली। संन्यास के बाद उन्हें स्वामी हर्षानंद गिरि नाम दिया गया है। हर्षा के संन्यास पर मध्य प्रदेश संत समिति के अध्यक्ष महाराज अनिलानंद ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि यह संन्यास सनातन धर्म की मर्यादा के विपरीत है। उन्होंने यह भी मांग की है कि हर्षा को दीक्षा देने वाले सुमनानंद गिरि महाराज की जांच की जाए। वहीं, संन्यास परंपरा का पूजन कराने वाले आचार्य तन्मय वेदका दातार ने कहा कि हर्षा के संन्यास की प्रक्रिया में पारंपरिक नियमों का पालन नहीं हुआ। मामले में लगातार आ रहे बयानों के मद्देनजर, दैनिक भास्कर ने सुमनानंद गिरि और आचार्य तन्मय वेदका दातार से बातचीत की। पढ़िए, रिपोर्ट… आचार्य दातार बोले- मुंडन नहीं कराया, मेकअप में नजर आ रहीं आचार्य तन्मय वेदका दातार ने कहा- हर्षा का संन्यास जल्दबाजी में कराया गया। इसमें कई पारंपरिक नियमों का पालन नहीं हुआ। आचार्य के अनुसार, संन्यास लेने से पहले 17 प्रकार के पिंडदान किए जाते हैं। इनमें माता-पिता के साथ स्वयं का भी पिंडदान शामिल होता है। इस प्रक्रिया में मुंडन कराना अनिवार्य होता है, लेकिन हर्षा का संन्यास बिना बाल कटवाए ही करा दिया गया। संन्यास लेने के बाद भी हर्षा आम युवतियों की तरह मेकअप और आभूषणों के साथ नजर आ रही हैं, जबकि संन्यास परंपरा में इसका उपयोग वर्जित माना जाता है। वह अभी भी पारंपरिक साध्वी स्वरूप या संन्यासी वेशभूषा में नजर नहीं आई हैं। सुमनानंद गिरि बोले- हर्षा से 50 बार पूछने के बाद ही दीक्षा दी गई वहीं, हर्षा को दीक्षा देने वाले सुमनानंद गिरि महाराज ने कहा- संन्यास के दौरान हर्षा ने बाल इसलिए नहीं कटवाए, क्योंकि वह पहले ही एक बार मुंडन करवा चुकी थीं। उन्होंने कहा कि प्रयागराज कुंभ में निरंजनी अखाड़े की पेशवाई के दौरान हर्षा शाही रथ पर सवार हुई थीं, तब किसी ने आपत्ति नहीं जताई। उन्होंने कहा कि मेरे द्वारा दी गई दीक्षा के बाद हर्षा, हर्षानंद गिरि के रूप में पूरी तरह संन्यासी बन चुकी हैं। सुमनानंद गिरि ने कहा कि दीक्षा देने से पहले मैंने हर्षा से बार-बार नियमों के पालन को लेकर पूछा। लगभग 50 बार पुष्टि करने के बाद ही मैंने दीक्षा दी। उन्होंने यह भी कहा कि अब हर्षा किसी भी अखाड़े में जाएं, इससे मुझे कोई आपत्ति नहीं है। दीक्षा के समय हर्षा के परिवार के सदस्य भी मौजूद थे। पढ़िए, हर्षा के संन्यास पर उठ रहे सवालों पर आचार्य के जवाब सवाल- हर्षा रिछारिया ने कौन सा संन्यास लिया? आचार्य दातार- हर्षा ने संन्यास लिया है। उनका पिंडदान हुआ, शिखा और दंड का त्याग भी कराया गया। संन्यास लेने के बाद उन्हें सांसारिक जीवन का त्याग करना होगा। सवाल- मुंडन नहीं करवाया गया? आचार्य दातार- मुंडन कराना या शिखा त्याग करना गुरु के निर्णय पर निर्भर होता है। दीक्षा देने वाला गुरु तय करता है कि प्रक्रिया किस रूप में पूरी की जाएगी। सवाल- नाम परिवर्तन का क्या नियम है? आचार्य दातार- संन्यास के बाद साधक को अपना सांसारिक नाम छोड़ना होता है। साथ ही ब्रह्मचर्य, व्रत और तप का पालन अनिवार्य होता है। संन्यास में गुरु की आज्ञा सर्वोपरि मानी जाती है। सवाल- संन्यास के दिन की पूरी प्रक्रिया क्या है? आचार्य दातार- संन्यास के दिन सुबह से ही व्रत शुरू हो जाता है। दिनभर तपस्या होती है। शाम को शिप्रा तट पर दशविधि स्नान, पिंडदान और अन्य धार्मिक विधियां कराई जाती हैं। इसके बाद साधकों को अखाड़े में लाकर धर्म ध्वजा के नीचे जप कराया जाता है। रात में आचार्य और महामंडलेश्वर द्वारा विजय हवन संस्कार कराया जाता है। उसी समय गुरु मंत्र देकर दीक्षा पूर्ण की जाती है। मामले से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… मॉडल का संन्यास परंपरा के खिलाफ, संत समिति अध्यक्ष बोले- इसकी जांच हो महाकुंभ 2024 से सुर्खियों में आई हर्षा रिछारिया अब स्वामी हर्षानंद गिरि के नाम से जानी जाएंगी। वे आधिकारिक रूप से संन्यास ले चुकी हैं। उज्जैन के मौनी तीर्थ आश्रम में उन्हें महामंडलेश्वर सुमनानंदजी महाराज ने दीक्षा दिलाई। हालांकि, उनके संन्यास पर मध्य प्रदेश संत समिति के अध्यक्ष महाराज अनिलानंद को ऐतराज है। पढ़ें पूरी खबर… हर्षा के मेकअप पर सवाल, बोलीं- धूप में खड़े रहना है तो सनस्क्रीन जरूरी सोशल मीडिया ट्रेंड से चर्चा में आईं महाकुंभ-24 की वायरल साध्वी हर्षा रिछारिया अब आधिकारिक रूप से संन्यास ले चुकी हैं। वे हर्षानंद गिरि के नाम से जानी जाएंगी। उज्जैन के मौनी तीर्थ आश्रम में उन्हें महामंडलेश्वर सुमनानंदजी महाराज ने दीक्षा दिलाई। महाकुंभ से अब तक का समय उन्होंने बेहद कठिन बताया। पढ़ें पूरी खबर…
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