इस कदम से सरकारी बॉन्ड यील्ड और डॉलर दोनों में गिरावट आई। निवेशकों में यह चिंता पैदा कर दी है कि अमेरिकी नीति डॉलर में भरोसा कमजोर कर सकती है। यही वह थीम है, जिसने 2025 में सोने को 65% की शानदार तेजी दिलाने में मदद की थी। अमेरिकी उधारी लागत को दबाने की इस कोशिश का सबसे बड़ा फायदा सोने को होगा, जबकि इसकी कीमत डॉलर को चुकानी पड़ेगी।
अभी भी रिकॉर्ड ऊंचाई से दूर है सोना
सोने के प्रति निवेशकों के रुख में यह एक बड़ा बदलाव है। साल की शुरुआत में अपने रिकॉर्ड हाई से सोना ज्यादातर नीचे ही रहा। फिलहाल सोना जनवरी के अंत में बने अपने शिखर से अभी भी करीब 1,00 डॉलर प्रति औंस नीचे है।
कमजोर डॉलर ने सोने को दी उड़ान
बता दें शुक्रवार को डॉलर इंडेक्स तीन महीने के निचले स्तर पर आ गया, जबकि इस सप्ताह की शुरुआत में ही उसमें भारी गिरावट आ चुकी थी। ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने गुरुवार को और आगे बढ़ते हुए कहा कि वे महंगे कर्ज की बायबैक बढ़ाने के लिए तैयार हैं, और जल्द ही प्रशासन बढ़ती उधारी लागत से निपटने के लिए एक वित्तीय पहल पेश करेगा।
2025 में क्यों उछला था सोना
2025 में सोने की उछाल के पीछे सबसे बड़ी कहानी ‘डिबेसमेंट ट्रेड’ थी। इस सोच के अनुसार, जापान, फ्रांस और अमेरिका जैसे कर्ज में डूबे देश कोविड-19 के बाद राजकोषीय अनुशासन को अपनाने के लिए तैयार नहीं दिखे, और उनके लिए सॉल्वेंसी का एकमात्र रास्ता मुद्रास्फीति और कमजोर मुद्रा ही दिखा, जिससे कीमती धातुओं को फायदा होता है।
ईटीएफ में भारी निवेश, लेकिन…
सोने से जुड़े एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ईटीएफ) में पिछले कुछ महीनों से लगातार निकासी हो रही थी, लेकिन अब यह सिलसिला पूरी तरह बदल गया है। ब्लूमबर्ग द्वारा ट्रैक किए गए फंड्स ने गुरुवार को 18 टन सोना खरीदा, जो सितंबर 2025 के बाद एक दिन में सबसे बड़ी खरीदारी थी, और लगातार पांचवें सप्ताह निवेश बढ़ने की संभावना है। हालांकि, इस महीने सोने में करीब 14% की आई तेजी ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के कारण धीमी पड़ सकती है, क्योंकि तेल की ऊंची कीमतें मुद्रास्फीति के जोखिम और ब्याज दर बढ़ने की संभावना को बनाए रखती हैं।
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