आतिथ्य क्षेत्र की कंपनी प्राइड होटल्स इस साल दिसंबर तक अपना आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लाने की तैयारी कर रही है। इस निर्गम का आकार करीब 1,000 करोड़ रुपये हो सकता है। प्राइड होटल्स के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) सत्येन जैन ने पीटीआई-से कहा, ‘‘कंपनी तेजी से अपने कारोबार का विस्तार कर रही है।
पिछले 12 माह में उसने नौ नए होटल खोले हैं। यह इंदौर में नौवां होटल है।’’
इसके साथ ही प्राइड होटल्स के पोर्टफोलियो में अब कुल 40 संपत्तियां हो गई हैं। इनमें आठ होटल कंपनी के स्वामित्व वाले हैं, जबकि 32 होटल प्रबंधन अनुबंध के तहत संचालित किए जा रहे हैं।
कंपनी ने अगले डेढ़ से दो साल में खुलने वाले 32 और होटल के लिए समझौते किए हैं। इनके शुरू होने के बाद कंपनी का पोर्टफोलियो करीब 72 संपत्तियों तक पहुंच सकता है। जैन ने कहा कि कंपनी का ध्यान चार प्रमुख क्षेत्रों पर है।
इनमें मौजूदा बाजारों में विस्तार, बड़े विवाह एवं एमआईसीई (मीटिंग, इंसेंटिव, कॉन्फ्रेंस एंड एग्जिबिशन) होटल को लक्ष्य बनाना, नए पर्यटन स्थलों में प्रवेश और तीर्थस्थलों पर विस्तार शामिल है। उन्होंने कहा कि तीर्थ पर्यटन कंपनी के लिए तेजी से उभरता अवसर है। उनके अनुसार, छुट्टी मनाने वाले पर्यटकों के मुकाबले तीर्थयात्रियों के बार-बार आने की संभावना अधिक होती है।
पुरी जैसे स्थानों में धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ विवाह समारोहों से जुड़ा कारोबार भी कंपनी के लिए आकर्षक अवसर प्रदान करता है। कंपनी अपने पोर्टफोलियो में स्वामित्व वाले होटल की हिस्सेदारी भी बढ़ाने की योजना बना रही है। वहीं, बढ़ती प्रति व्यक्ति आय, बेहतर हवाई एवं सड़क संपर्क और बदलती उपभोक्ता प्राथमिकताओं से घरेलू अवकाश पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
प्राइड होटल्स ने अक्टूबर, 2025 में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास आईपीओ के लिए शुरुआती दस्तावेज दाखिल किए थे और जनवरी, 2026 में उसे आईपीओ लाने की मंजूरी मिल गई थी। दस्तावेजों के अनुसार, प्रस्तावित सार्वजनिक निर्गम में ₹260 करोड़ के नए शेयर जारी किए जाएंगे तथा प्रवर्तकों एवं प्रवर्तक समूह की इकाइयों द्वारा 3.92 करोड़ तक शेयरों की बिक्री पेशकश (ओएफएस) लाई जाएगी। बाजार विशेषज्ञों ने निर्गम का आकार करीब 1,000 करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया है।
जैन ने कहा कि हमारी योजना इस साल दिसंबर तक आईपीओ लाने की है। आईपीओ से प्राप्त धन का इस्तेमाल मौजूदा होटल के नवीनीकरण, कर्ज चुकाने और सामान्य कंपनी कामकाज के लिए किया जाएगा।
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