सालों से जिस फर्क की बात होती थी, वह अब धीरे-धीरे कम होता दिख रहा है. पढ़ाई के मैदान में अब बेटियां पीछे नहीं, बल्कि कई जगह आगे निकल चुकी हैं. स्कूल से लेकर पीजी तक, नामांकन हो या पास होने की संख्या लड़कियां लड़कों से ज्यादा दिख रही हैं.
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) की रिपोर्ट ‘Women and Men in India 2025’ बताती है कि शिक्षा में एक नई पीढ़ी बदलाव की कहानी लिख रही है. जहां कभी लड़कियों को स्कूल भेजना भी चुनौती माना जाता था, वहीं अब वे पढ़ाई के हर स्तर पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रही हैं.
स्कूल में बराबरी से आगे तक
रिपोर्ट के अनुसार प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक स्तर तक लड़कियों का नामांकन लड़कों से ज्यादा है. यानी स्कूलों में अब बेटियां संख्या में भी आगे हैं. नई शिक्षा नीति के बाद यह बदलाव और साफ नजर आया है. फाउंडेशन से लेकर सेकेंडरी स्तर तक, हर चरण में लड़कियों की उपस्थिति बढ़ी है.
सिर्फ नामांकन ही नहीं स्कूल छोड़ने की दर भी कम हुई है. 2022-23 से 2024-25 के बीच ड्रॉपआउट में गिरावट आई है. खासकर मिडिल और प्रिपरेटरी स्तर पर लड़कियों ने पढ़ाई जारी रखने में बेहतर प्रदर्शन किया है. हालांकि सेकेंडरी स्तर पर अभी भी कुछ छात्र पढ़ाई छोड़ रहे हैं, लेकिन स्थिति पहले से बेहतर है.
साक्षरता में पीढ़ी का फर्क
देश में कुल साक्षरता के मामले में अब भी पुरुष और महिला के बीच करीब 14 प्रतिशत का अंतर है. लेकिन 15 से 24 साल की उम्र के युवाओं में यह फर्क घटकर सिर्फ 3.8 प्रतिशत रह गया है. यह दिखाता है कि नई पीढ़ी में लड़कियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं. 1981 में जहां महिला साक्षरता केवल 30.6 प्रतिशत थी, वहीं अब यह 70 प्रतिशत से ऊपर पहुंच चुकी है.
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हायर एजुकेशन में बढ़ती भागीदारी
कॉलेज और यूनिवर्सिटी स्तर पर भी तस्वीर बदल रही है. उच्च शिक्षा में लड़कियों का ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो (GER) बढ़कर 30.2 प्रतिशत हो गया है, जबकि लड़कों का 28.9 प्रतिशत है. यानी कॉलेज में दाखिला लेने वाली लड़कियों की संख्या अब ज्यादा है.रिपोर्ट बताती है कि कुल पास होने वाले छात्रों में 51.48 प्रतिशत महिलाएं हैं.
खास बात यह है कि एमफिल जैसे उच्च स्तर पर 76 प्रतिशत छात्राएं हैं. अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट में भी आधे से ज्यादा छात्राएं हैं. हालांकि पढ़ाई में भागीदारी बढ़ी है, लेकिन विषयों के चयन में अब भी फर्क दिखता है. लड़कियां आर्ट्स, साइंस, सोशल साइंस और मेडिकल क्षेत्र में ज्यादा हैं. वहीं इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी, आईटी और मैनेजमेंट में अब भी लड़कों की संख्या अधिक है.
पढ़ाई के साल और खर्च में अंतर
एक और दिलचस्प बात सामने आई है. महिलाओं की औसत पढ़ाई 7.4 साल है, जबकि देश का औसत 8.4 साल है. इसका मतलब है कि कई लड़कियां अब भी जल्दी पढ़ाई छोड़ देती हैं. एक साल में लड़कों की पढ़ाई पर औसतन 13,901 रुपये खर्च होते हैं, जबकि लड़कियों पर 12,101 रुपये.
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