गौतम गंभीर और वीवीएस लक्ष्मण की तुलना पर दीप दासगुप्ता ने बड़ी बात कही है। गंभीर की गैर मौजूदगी में लक्ष्मण ने जिम्बाब्वे दौरे पर भारत के हेड कोच की जिम्मेदारी संभाली थी।
‘दोनों के साथ ऐसा करना बुरा है’
दीप दासगुप्ता ने बुधवार को अपने यूट्यूब चैनल पर कहा, ”मुझे बुरा लगा रहा है कि दोनों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा किया जा रहा जबकि सब एक ही सिस्टम का हिस्सा हैं। अगर टीम इंडिया की बात करें तो यह तीन स्तंभ पर आधारित है। एक टीम का सपोर्ट स्टाफ है, दूसरा सिलेक्टर्स हो गए और तीसरा पिलर सीओई है। वो तालमेल होना बहुत जरूरी है। क्योंकि गौतम गंभीर हर वक्त 25-30 प्लेयर्स के साथ तो रहेंगे नहीं। वह सिर्फ 15 प्लेयर्स के साथ रहेंगे। बाकी प्लेयर का क्या होगा। ऐसे में सिलेक्टर्स की भूमिका होती है। प्लेयर्स को कैसे डेवलप करेंगे, गौतम को क्या पसंद है और क्या चाहिए, वो सीओई देखता है। सीओई का काम बहुत अहम है। तीनों पिलर्स में से एक भी अलग हो जाता है तो चीजें अस्त-व्यस्त हो जाती है। ऐसे में जब गौतम बनाम वीवीएस या कोई और किया जाएगा तो समस्या होगी। अगर हमसे ज्यादा उनके दिमाग में बनाम आ गया तो मसला होगा।।”
‘वीवीएस को ऐसा माहौल पसंद’
उन्होंने आगे कहा, ”सबको कोचिंग स्टाइल अलग होता है। मैंने वीवीएस के साथ काम किया है। मैंने ड्रेसिंग रूम शेयर किया है। वीवीएस माहौल को संतुलित रखने की कोशिश करते हैं। चाहे स्कोर 50/5 हो या 500/5, अगर म्यूजिक चल रहा है तो वह चलता ही रहेगा। उनको वो माहौल पसंद है। ड्रेसिंग रूम का माहौल देखकर पता नहीं लगना चाहिए कि मैच सिचुएशन क्या है। उनकी सोच यही है कि मैच की स्थिति से माहौल तय नहीं होना चाहिए। यह वीवीएस का कोचिंग स्टाइल है। मुझे गौतम का कोचिंग स्टाइल नहीं पता। हालांकि, मैं यही मानना चाहूंगा कि सेम ही होगा। मुझे यकीन है कि गौतम और वीवीएस के बीच इस बात पर रेगुलर बातचीत होती रहती होगी कि चुने गए 15 खिलाड़ियों और टीम से बाहर के खिलाड़ियों से क्या उम्मीदें हैं।” भारत को जिम्बाब्वे सीरीज के बाद अब टेस्ट फॉर्मेट में उतरना है। भारत को श्रीलंका में दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेलनी है, जिसकी शुरुआती 15 अगस्त से होगी।”
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