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सूत्रों के अनुसार, विश्वविद्यालय से तुरंत प्रदर्शनी स्थल छोड़ने को कहा गया।
विवाद उस समय शुरू हुआ जब गालगोटिया विश्वविद्यालय ने प्रदर्शनी में ‘ओरायन’ नाम का ‘रोबोट डॉग’ प्रदर्शित किया। आलोचकों का कहना था कि यह विश्वविद्यालय का स्वदेशी नवाचार नहीं है बल्कि चीन में बना एक रोबोट है।
इसके बाद विश्वविद्यालय को सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा।
सूत्रों ने बताया कि विश्वविद्यालय पर आयातित प्रौद्योगिकी को अपनी बताकर पेश करने के आरोप लगे हैं।
विश्वविद्यालय ने हालांकि इस मामले पर अपना पक्ष रखते हुए बयान भी जारी किया।
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आयोजकों की सख्त कार्रवाई
सूत्रों के अनुसार, जैसे ही तकनीक के स्वामित्व को लेकर विवाद गहराया, समिट के आयोजकों ने विश्वविद्यालय को तुरंत प्रदर्शनी स्थल छोड़ने का निर्देश दिया।
स्टॉल खाली कराया गया: प्रदर्शनी की साख और तकनीकी शुचिता को बनाए रखने के लिए विश्वविद्यालय से अपना स्टॉल और प्रदर्शित उपकरण तुरंत हटाने को कहा गया।
सोशल मीडिया पर किरकिरी: इस घटना के बाद ट्विटर (X) और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर विश्वविद्यालय की जमकर आलोचना हुई, जिसके बाद इसे एक “शैक्षणिक धोखाधड़ी” (Academic Fraud) के रूप में देखा जाने लगा।
विश्वविद्यालय का पक्ष
विवाद बढ़ता देख गलगोटिया विश्वविद्यालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर अपना पक्ष रखा। विश्वविद्यालय ने सफाई दी कि उनका उद्देश्य केवल तकनीक का प्रदर्शन करना था, हालांकि उनके बयान से आलोचक संतुष्ट नहीं दिखे। सूत्रों का कहना है कि यह मामला अब शैक्षणिक संस्थानों में अनुसंधान की नैतिकता (Ethics of Research) पर एक बड़ी बहस का रूप ले चुका है।
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