लद्दाख के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद थुपस्तान छेवांग ने शनिवार को क्षेत्र के राजनीतिक और सामाजिक नेताओं से अपील की कि वे केंद्र के साथ हालिया बातचीत में हुई प्रगति को आगे बढ़ाएं, न कि सड़कों पर उतरें। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ हुई हालिया बातचीत के कई सकारात्मक नतीजे निकले हैं। छेवांग ने पिछले साल जुलाई में ‘लेह एपेक्स बॉडी’ (एलएबी) के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था।
उन्होंने राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची के तहत लद्दाख को शामिल किये जाने जैसी मांगों के लिए आंदोलन का नेतृत्व किया था। छेवांग ने नौ सितंबर को केंद्रीय गृह मंत्रालय की उप-समिति के साथ हुई बैठक में हिस्सा लिया था। बातचीत के तुरंत बाद, एलएबी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) के नेताओं ने नतीजों पर निराशा जताई।
उन्होंने कहा कि सरकार केंद्र शासित प्रदेश के लिए प्रस्तावित निर्वाचित संस्था से जुड़े बहुप्रतीक्षित मसौदे को पेश करने में विफल रही। पर्यावरण कार्यकर्ता और एलएबी के सदस्य सोनम वांगचुक ने कहा कि 22 मई की बैठक के बाद से ‘कोई खास प्रगति’ नहीं हुई है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर निर्वाचित लोकतांत्रिक संस्था के गठन से पहले बड़े फैसले लिए जाते हैं, तो लद्दाख के समूह फिर से आंदोलन शुरू कर सकते हैं।
लेह में पत्रकारों से बात करते हुए छेवांग ने कहा कि एलएबी, केडीए और केंद्रीय गृह मंत्रालय के बीच हालिया बैठक ‘सार्थक’ रही और इसमें लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश से जुड़े कई अहम मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई। हालांकि, उन्होंने एलएबी और केडीए की ओर से बैठक के नतीजों को जनता के सामने पेश करने के तरीके को लेकर निराशा जताई। उन्होंने कहा कि बैठक की कई सकारात्मक बातों के अलावा सहमति वाले मुद्दों को लोगों के सामने नहीं लाया गया।
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