अधिकारियों ने बताया कि जामवाल की उम्र 70 वर्ष से अधिक है और हमले के वक्त वह नशे की हालत में था। उन्होंने बताया कि सतर्क कर्मियों द्वारा उसका हथियार छीने जाने और जमीन पर गिराए जाने से पहले उसने एक गोली चलाई। अधिकारियों ने यह भी बताया कि गोलीबारी में कोई घायल नहीं हुआ। उधर, हमले पर नाराजगी व्यक्त करते हुए जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा, “अल्लाह मेहरबान है। मेरे पिता बाल-बाल बच गए।” उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि फिलहाल विवरण अस्पष्ट हैं, लेकिन जो ज्ञात है वह यह है कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ “बिल्कुल करीब” आकर गोली चलाने में कामयाब हो गया। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘अंदरुनी घेरे के सुरक्षा दस्ते ने हमले के प्रयास को नाकाम कर दिया। इस समय जवाबों से ज्यादा सवाल हैं, जिनमें यह भी शामिल है कि ज़ेड प्लस श्रेणी के साथ एनएसजी सुरक्षा प्राप्त पूर्व मुख्यमंत्री के इतने करीब कोई व्यक्ति कैसे पहुंच गया।’’
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बताया जा रहा है कि फारुक अब्दुल्ला और सुरिंदर चौधरी पार्टी नेता बी.एस. चौहान को उनके बेटे की शादी पर बधाई देने आए थे और वे कार्यक्रम स्थल पर एक घंटे से अधिक समय तक मौजूद रहे। उपमुख्यमंत्री ने घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए पत्रकारों से कहा कि आपको सुरक्षाकर्मियों और पुलिस से पूछना चाहिए कि इतनी बड़ी चूक कैसे हुई।
दूसरी ओर, जम्मू शहर के दक्षिण क्षेत्र के पुलिस अधीक्षक अजय शर्मा ने बताया कि विवाह समारोह में लाइसेंस प्राप्त हथियार से गोली चलने की घटना हुई थी। आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और उससे पूछताछ की जा रही है। प्रारंभिक जांच में किसी प्रकार के आतंकवादी कोण की पुष्टि नहीं हुई है।
हम आपको बता दें कि इस घटना के बाद एक वीडियो भी तेजी से प्रसारित हो रहा है जिसमें आरोपी खुद को 63 वर्ष का बताता हुआ नजर आता है। वीडियो में वह दावा करता है कि वह पिछले बीस वर्ष से फारूक अब्दुल्ला को मारने की योजना बना रहा था और यह उसका निजी एजेंडा था। हालांकि पुलिस ने इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होने की बात कही है।
दूसरी ओर, राजनीतिक और सामाजिक नेताओं ने भी इस घटना की कड़ी निंदा की है। कांग्रेस अध्यक्षा मल्लिकार्जुन खरगे ने आज राज्यसभा में यह मामला उठाते हुए जम्मू-कश्मीर में कानून व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाये। वहीं कश्मीर के प्रमुख धार्मिक नेता मीरवाइज उमर फारूक ने इस घटना को चिंताजनक बताते हुए कहा कि किसी वरिष्ठ नेता पर इस तरह का हमला बेहद निंदनीय है और इसकी पूरी जांच होनी चाहिए। पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद लोन ने भी इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि यह कायरतापूर्ण कृत्य है और सौभाग्य की बात है कि सभी नेता सुरक्षित हैं। वहीं पीडीपी के विधायक वहीद पर्रा ने इसे बेहद चौंकाने वाली और दुर्भाग्यपूर्ण घटना बताया और कहा कि वरिष्ठ नेता के खिलाफ हिंसा किसी भी हालत में स्वीकार नहीं की जा सकती।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद आगा रुहुल्लाह मेहदी ने भी कहा कि इस प्रकार की हिंसक घटनाएं लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा भी की जा रही है ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सके। हालांकि यह घटना एक बार फिर वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक कार्यक्रमों में सुरक्षा प्रबंधों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
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