अभिषेक मिश्रा ने वर्ष 2017 से 2021 के बीच आईआईटी रुडकी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। उच्च शिक्षा प्राप्त होने के बावजूद उसने आध्यात्मिक गुरु का चोला पहन लिया और मथुरा के राधाकुंज इलाके में पिछले लगभग चार वर्षों से रह रहा था। यहां वह खुद को कथावाचक और धार्मिक गुरु के रूप में प्रस्तुत करता था। युवाओं और महिलाओं के बीच प्रभाव बढ़ाने के लिए उसने “राधा कृपा अमृत” नाम से एक यूट्यूब चैनल भी बनाया था, जहां वह हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में प्रवचन देता था। इसके अलावा उसने अपने फर्जी नाम से सोशल मीडिया पर पेशेवर पहचान भी बना रखी थी।
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पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी इन मंचों का उपयोग केवल धार्मिक प्रचार के लिए नहीं, बल्कि युवतियों को अपने जाल में फंसाने के लिए करता था। विशेष रूप से इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि से जुड़ी युवतियों को वह निशाना बनाता था। वह पहले उनसे संपर्क करता, फिर धीरे धीरे उन्हें परिवार से दूर होने के लिए प्रेरित करता और अंततः अपने साथ रहने के लिए तैयार कर लेता था। पुलिस के अनुसार एक समय उसके मथुरा स्थित ठिकाने पर करीब 24 युवक और युवतियां साथ रह रहे थे।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि आरोपी युवतियों को “गंधर्व विवाह” का हवाला देकर अपने प्रभाव में लेता था। वह इसे प्रेम और आपसी सहमति पर आधारित प्राचीन विवाह परंपरा बताकर महिलाओं को बहकाता और फिर उनका शोषण करता था। आरोप है कि वह प्रसाद के नाम पर दूध में नशीला पदार्थ मिलाकर पीड़िताओं को देता था। इसके बाद वह उनके साथ दुष्कर्म करता और पूरी घटना के वीडियो तथा तस्वीरें अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लेता था।
मामले का खुलासा तब हुआ जब छत्तीसगढ़ की एक युवती ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। युवती ने आरोप लगाया कि आरोपी ने धार्मिक विश्वास का फायदा उठाकर उसका शारीरिक शोषण किया और बाद में आपत्तिजनक वीडियो दिखाकर उसे धमकाया। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। उसके मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों से कई आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो भी बरामद हुए हैं, जिन्हें जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
पुलिस के अनुसार आरोपी अपने साथ रहने वाले लोगों के परिवारों से धन उगाही भी करता था। आसपास के इलाकों की अन्य युवतियों को भी वह लगातार अपने प्रभाव में लेने की कोशिश करता था। करीब छह महीने पहले एक युवती का परिवार उसे वापस घर ले जाने पहुंचा था, लेकिन उस समय आरोपी और उसके साथियों ने वहां हंगामा खड़ा कर दिया था।
जांच में यह भी सामने आया कि शुरुआत में आरोपी की मां भी उसके साथ रहती थी, लेकिन बेटे की गतिविधियों और व्यवहार से परेशान होकर वह वहां से चली गई। पहले आरोपी किराये के मकान में रहता था, बाद में उसने अपना मकान बनवा लिया। पुलिस का कहना है कि समय बीतने के साथ उसके साथ रह रहे कई युवक और युवतियां उसके व्यवहार पर संदेह होने के बाद वहां से चले गए। बताया जाता है कि शुरुआती दौर में आरोपी उनका मानसिक रूप से ब्रेनवाश करता था ताकि वे उसके प्रति वफादार बने रहें। जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी महिलाओं को यह विश्वास दिलाता था कि उसकी आध्यात्मिक शक्ति उनके जीवन की समस्याओं को दूर कर सकती है। कई पीड़िताएं मानसिक रूप से इतनी प्रभावित हो चुकी थीं कि वे उसके निर्देशों का विरोध नहीं कर पा रही थीं।
देखा जाये तो यह मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि समाज के सामने एक गंभीर चेतावनी भी है। धर्म और अध्यात्म के नाम पर लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ कर उन्हें मानसिक रूप से नियंत्रित करने की प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है। सामाजिक विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव ने ऐसे स्वयंभू गुरुओं को तेजी से लोकप्रिय बनाया है और लोग बिना सत्यापन के उन पर भरोसा कर लेते हैं।
फिलहाल पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि आरोपी ने अब तक कितनी महिलाओं को अपना शिकार बनाया। आशंका है कि आने वाले दिनों में और भी पीड़िताएं सामने आ सकती हैं। पुलिस प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति पर आंख मूंदकर भरोसा न करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।
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