सबसे लंबा इंतजार हर EV के लिए नहीं है। यह कुछ खास मॉडल्स, बैटरी पैक और वैरिएंट तक ही सीमित है। उदाहरण के लिए, टाटा टियागो EV और पंच EV के कुछ वैरिएंट के लिए वेटिंग पीरियड 18 से 24 सप्ताह बताया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ, कर्व EV लगभग एक से दो सप्ताह में मिल सकती है।
सबसे लंबा इंतजार हर EV के लिए नहीं है। यह कुछ खास मॉडल्स, बैटरी पैक और वैरिएंट तक ही सीमित है। उदाहरण के लिए, टाटा टियागो EV और पंच EV के कुछ वैरिएंट के लिए वेटिंग पीरियड 18 से 24 सप्ताह बताया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ, कर्व EV लगभग एक से दो सप्ताह में मिल सकती है।
डीलर्स का कहना है कि पूछताछ में बढ़ोतरी की एक वजह E20 पेट्रोल को लेकर चल रही बहस और प्यूचर में इथेनॉल मिलाने को लेकर कुछ ग्राहकों के मन में अनिश्चितता है। गाड़ी चलाने का खर्च एक बड़ी वजह है जिसकी वजह से लोग दोनों तरह के पावरट्रेन पर विचार करते हैं। नई EV लॉन्च होने से लोगों के पास ज्यादा ऑप्शन मौजूद हैं, जबकि कुछ साल पहले की तुलना में अब हैचबैक, सेडान और SUV की एक बड़ी रेंज में फैक्ट्री-फिटेड CNG का ऑप्शन मिल रहा है।
2026 में E20 को लेकर पुरानी पेट्रोल गाड़ियों के मालिकों के बीच चिंताएं और बढ़ गई हैं। साथ ही, EV की बिक्री में भी तेजी आई है। उदाहरण के लिए, टाटा ने जुलाई 2026 में 13,578 इलेक्ट्रिक पैसेंजर गाड़ियां बेचीं, जो जुलाई 2025 की 6,712 गाड़ियों के मुकाबले 102% ज्यादा है। कंपनी का कहना है कि छह महीनों में EV की बुकिंग तीन गुना हो गई है और प्रोडक्शन हर महीने लगभग 9,000 गाड़ियों से बढ़कर 15,000 से ज्यादा हो गया है।
18 से 24 सप्ताह का वेटिंग पीरियड टियागो EV और पंच EV के कुछ खास वर्जन के लिए है, जिनमें कम कीमत वाले और छोटी बैटरी वाले वैरिएंट शामिल हैं। यह बात इसलिए अहम है, क्योंकि ये कारें इलेक्ट्रिक-कार मार्केट में आम लोगों की पहुंच वाली रेंज में आती हैं। इसकी तुलना में कर्व EV के लिए वेटिंग पीरियड सिर्फ एक से दो सप्ताह बताया जा रहा है। इससे पता चलता है कि प्रोडक्शन का बंटवारा और वैरिएंट की पॉपुलैरिटी भी उतनी ही मायने रखती है जितना कि खुद EV का ब्रांड है।
इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स के मामले में भी ऐसा ही ट्रेंड दिख रहा है। डीलर्स से मिली जानकारी के मुताबिक, इनकी मांग में 30 से 40% की बढ़ोतरी हुई है। कुछ मामलों में तो TVS आईक्यूब के लिए 4 से 5 महीने की वेटिंग लिस्ट भी है। वेटिंग पीरियड शहर, कलर, बैटरी और डीलर के स्टॉक के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है, इसलिए देश भर के आंकड़े सिर्फ एक अंदाजा देते हैं।
सबसे ज्यादा CNG कारों के बारे में भी ज्यादा पूछताछ हो रही है। जिन ग्राहकों के पास घर पर भरोसेमंद चार्जिंग की सुविधा नहीं है या जो अक्सर लंबी दूरी तक गाड़ी चलाते हैं, उनके लिए CNG एक जानी-पहचानी इंटरनल-कंबशन इंजन वाली कार का ऑप्शन है, जिसका फ्यूल का खर्च पेट्रोल के मुकाबले काफी कम होता है। CNG भरवाने के लिए लाइन में लगना पड़ सकता है, गैस पर परफॉर्मेंस आमतौर पर थोड़ी कम होती है। सिलेंडर की वजह से सामान रखने की जगह कम हो सकती है। हालांकि, ट्विन-सिलेंडर आने से ये प्रॉब्लम भी खत्म हो गई है।
CNG कारों में पेट्रोल टैंक भी होता है और वे पेट्रोल पर भी चल सकती हैं, इसलिए CNG चुनने का मतलब यह नहीं है कि इथेनॉल कम्पैटिबिलिटी पूरी तरह बेकार हो गई है। हालांकि, ज्यादा माइलेज वाली गाड़ी के मालिक रोजाना का ज्यादातर सफर CNG पर कर सकते हैं और पेट्रोल का इस्तेमाल मुख्य रूप से गाड़ी स्टार्ट करने, बैकअप के तौर पर या गैस ना मिलने पर कर सकते हैं। EV और CNG गाड़ियों की तरफ लोगों का रुझान साफ दिख रहा है।
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