Home Loan EMI Bounce: ज्यादातर लोगों के लिए होम लोन उनकी ज़िंदगी का सबसे बड़ा फ़ाइनेंशियल कमिटमेंट होता है. होम लोन की किश्त यानी ईएमआई न भर पाने पर लोग पेनल्टी, क्रेडिट स्कोर गिरने, रिकवरी कॉल और इस बात की चिंता करने लगते हैं कि कहीं बैंक प्रॉपर्टी के ख़िलाफ कोई कार्रवाई न कर दे.
हालांकि लंबे समय तक पेमेंट न करने से हालत गंभीर हो सकती है, लेकिन एक ईएमआई छूटने से आमतौर पर रातों-रात कोई बड़ा संकट नहीं खड़ा होता. इससे कहीं ज़्यादा जरूरी यह है कि इसके बाद उधार लेने वाला कितनी जल्दी प्रतिक्रिया देता है.
बता दें कि ज़्यादातर मामलों में लोगों के लिए मुश्किलें सिर्फ एक पेमेंट छूटने की वजह से नहीं, बल्कि इसलिए बढ़ती हैं क्योंकि वह डर या शर्म की वजह से शुरुआती स्टेज पर ही समस्या का हल करने से हिचकिचाते हैं.
EMI न भर पाने पर आमतौर पर क्या होता है?
सबसे जरूरी बात यह कि जब होम लोन की EMI का भुगतान नहीं हो पाता है तो बैंक आमतौर पर सबसे पहले लेट पेमेंट चार्ज या पेनल्टी ब्याज लगाते हैं. अगर देरी जारी रहती है तो रिमाइंडर कॉल, मैसेज और कलेक्शन से जुड़ी बातचीत शुरू हो जाती है. समय के साथ बार-बार पेमेंट न करने की जानकारी सिबिल स्कोर जैसे क्रेडिट ब्यूरो को दी जा सकती है, जिससे उधार लेने वाले के क्रेडिट स्कोर को काफी नुकसान हो सकता है.
कर्ज़ की बड़ी समस्या खड़ी होने से बचें
एक और आम गलती जो लोग करते हैं वह है होम लोन की EMI न भर पाने पर तुरंत महंगा शॉर्ट-टर्म लोन ले लेना. होम लोन के दबाव को संभालने के लिए बार-बार ज़्यादा ब्याज वाले पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड के कर्ज़ का इस्तेमाल करने से बाद में और भी बड़ा आर्थिक दबाव बन सकता है, खासकर तब जब कैश-फ़्लो की असल समस्या हल न हुई हो. इसीलिए उधार लेने वालों को ईमानदारी से यह देखना चाहिए कि मुश्किल कुछ समय के लिए है या लंबे समय तक चलने वाली है.
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अगर समस्या कुछ समय के लिए है तो शायद थोड़े समय के लिए कुछ बदलाव करने से ही काम चल जाए, लेकिन अगर कमाई में हमेशा डगमगाई रहती है तो खर्चों और कर्ज की देनदारियों में बड़े बदलाव करने की जरूरत पड़ सकती है.
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