अभिनेता दिव्येंदु को ‘मिर्जापुर’ वेब सीरीज के मुन्ना भैया से घर-घर में पहचान मिली. एक्टर ने इस सीरीज के बाद कई बेहतरीन फिल्मों में काम किया. ऐसे में अब वो किसी फिल्म या फिर सीरीज को लेकर चर्चा में नहीं हैं. बल्कि एक्टर ने मीम्स कल्चर पर रिएक्शन दिया है. मीम कल्चर पर उन्होंने पॉजिटिव राय रखी और उनका मानना है कि मीम बनाने वाले लोग काफी क्रिएटिव होते हैं.
दिव्येंदु का मानना है कि वो कहानी को नए तरीके से पेश करने में माहिर होते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे लोगों को फिल्म इंडस्ट्री में मौका मिलना चाहिए. दिव्येंदु ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, ‘लोगों का अपने पसंदीदा किरदारों को मीम के रूप में अपनी जिंदगी में जोड़ लेना एक बहुत ही खास अनुभव है.’
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मीम्स मजेदार और क्रिएटिव बनाए जाते हैं…
उन्होंने कहा, ‘यह देखकर अच्छा लगता है कि दर्शक किरदारों को इतना प्यार देते हैं कि वे उन्हें रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बना लेते हैं. मीम्स मजेदार और क्रिएटिव तरीके से बनाए जाते हैं, लेकिन किसी भी किरदार की लोकप्रियता के साथ जिम्मेदारी भी आती है.’ उन्होंने यह भी कहा, ‘किसी भी किरदार या कहानी को जरूरत से ज्यादा बढ़ा चढ़ाकर नहीं दिखाना चाहिए, क्योंकि इससे असली मतलब बदल सकता है.’
ऐसे लोगों को फिल्म में काम मिलना चाहिए…
दिव्येंदु का मानना है कि मीम बनाने वाले लोगों की सोच बहुत अलग होती है. उन्होंने कहा कि कई बार उन्हें लगता है कि ऐसे लोगों को फिल्म इंडस्ट्री में काम मिलना चाहिए, चाहे वो पर्दे के सामने न सही लेकिन डायलॉग लिखने या स्क्रिप्ट लिखने में जरूर हो उनका कहना है कि अलग-अलग चीजों को जोड़कर कहानी बनाने की उनकी सोच काफी प्रभावित करने वाली होती है.
‘ग्लोरी’ को लेकर क्या बोले दिव्येंदु शर्मा?
एक्टर दिव्येंदु इन दिनों वेब सीरीज ‘ग्लोरी’ में नजर आ रहे हैं. इसे ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर रिलीज किया गया है. ऐसे में उन्होंने फिल्म को लेकर रिएक्शन दिया था और बताया था कि उनके लिए ग्लोरी क्या है? अपनी कामयाबी और ‘ग्लोरी’ की परिभाषा को लेकर उन्होंने स्पष्ट तौर पर राय रखी थी. एक्टर का मानना है कि बाहरी तारीफ से ज्यादा काम में ईमानदारी महत्वपूर्ण है और यही उनके लिए असली ग्लोरी है.
उन्होंने कहा कि इस इंडस्ट्री में उनके लिए असली शान अपने काम से संतोष और खुद को स्क्रीन पर बेहतरीन प्रदर्शन के साथ देख पाने में है. दिव्येंदु ने कहा, “मुझे लगता है कि जिस काम से मैं खुश हूं, अगर लोग उसकी तारीफ करें तो यह अच्छी बात है. लेकिन सबसे जरूरी यह है कि मैं घर जाकर चैन से और खुशी से सो सकूं. खुद को स्क्रीन पर देखूं और शर्मिंदा न होऊं. मेरे लिए ग्लोरी की शुरुआत यहीं से होती है.”
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