अमेरिकी कॉमेडी लेखक रॉबर्ट ऑर्बेन ने कभी कहा था, ‘छुट्टियों का मतलब है कुछ न करना और उसे करने के लिए पूरा दिन होना।’ लेकिन 2026 में पर्यटकों की पसंद पूरी तरह बदल चुकी है। दूर-दराज के समुद्र तटों पर लेटकर धूप सेंकने के दिन अब पुराने हो गए हैं। आधुनिक यात्री अब ‘सन लाउंजर’ छोड़कर रोमांच और जोश की तलाश में निकल पड़े हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक, डेयरकेशंस 2026 का सबसे बड़ा टूरिज्म ट्रेंड बनकर उभरा है। रोमांच के शौकीन ये पर्यटक अब घाटियों में उतरने और चट्टानों से नीचे उतरने जैसे साहसिक कामों में दिलचस्पी ले रहे हैं। ‘एडवेंचर ट्रैवल ट्रेड एसोसिएशन’ के मुताबिक, लगभग 14% अंतरराष्ट्रीय यात्री अब इसी तरह की यात्राओं के प्रति उत्साहित हैं। एसोसिएशन की हीदर केली बताती हैं कि एडवेंचर ट्रैवल का मुख्य उद्देश्य कंफर्ट जोन से बाहर निकलना है। बीमा प्रदाता ‘स्पोर्ट्सकवर डायरेक्ट’ के आंकड़े भी इसकी पुष्टि करते हैं; 2023 से 2025 के बीच खेल गतिविधियों के लिए यात्रा बीमा खरीदने वालों की संख्या लगभग तीन गुना बढ़ गई है। आज पर्वतारोहण, राफ्टिंग, लंबी पैदल यात्रा और मैराथन जैसे आयोजन सबसे तेजी से बढ़ने वाली गतिविधियां हैं। हालांकि, हर कोई बहुत कठिन काम नहीं करना चाहता। इंडस्ट्री एक्सपर्ट इसे ‘सॉफ्ट एडवेंचर्स’ का नाम दे रहे हैं। इसमें लोग सफेद पानी की राफ्टिंग के बजाय शांत कयाकिंग और रहने के लिए विलासितापूर्ण आवास को चुन रहे हैं। एयरबीएनबी पर प्रकृति और आउटडोर अनुभवों- जैसे सर्फिंग और साइकिलिंग टूर-की बुकिंग अन्य सभी गतिविधियों से कहीं आगे निकल गई है। आत्मविश्वास के साथ लौटने का माध्यम ट्रैवल एक्सपर्ट जेम्स मार्शल कहते हैं,‘सोशल मीडिया पर बहादुरी दिखाने की चाहत इस ट्रेंड को ईंधन दे रही है। भविष्य में पर्यटन सिर्फ गंतव्य तक पहुंचने के बारे में नहीं, बल्कि खुद को चुनौती देने व नए, अधिक आत्मविश्वासी व्यक्तित्व के साथ वापस लौटने का जरिया बन जाएगा।’ साधारण छुट्टियों के बजाय गहन-यादगार अनुभव की चाह एयरबीएनबी की लिसा मार्केस कहती हैं कि आजकल लोग साधारण छुट्टियों के बजाय ‘गहन और यादगार अनुभवों’ की ओर बढ़ रहे हैं। समृद्ध यात्रियों के लिए एडवेंचर ट्रैवल स्टेटस सिंबल बन गया है। सूर्योदय के समय ज्वालामुखी का फटना देखने जैसे दुर्लभ नजारे सुनाने के लिए कहानियां और शानदार तस्वीरें देते हैं। दुनियाभर में हर कहीं अब यही देखने को मिल रहा है- सबसे अच्छी चीजें समुद्र तट पर नहीं, बल्कि ‘डर के दूसरी तरफ’ मिलती हैं। ऐसा लगता है कि केवल आराम करने वाली छुट्टियां अब ‘फ्लॉप’ होने की कगार पर हैं।
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