आज (4 मार्च) रंगों का महापर्व होली है। इस साल होलिका दहन (2 मार्च) के अगले दिन 3 तारीख को चंद्रग्रहण होने की वजह से अधिकतर क्षेत्रों में धुलंडी एक दिन देरी से यानी आज मनाई जा रही है। इस दिन सबसे पहले अपने इष्टदेव को प्राकृतिक रंग-गुलाल, कुमकुम-अबीर अर्पित करना चाहिए, इसके बाद अन्य लोगों के साथ होली खेलनी चाहिए। मान्यता है कि भगवान को रंग-गुलाल चढ़ाने से जीवन में सकारात्मकता आती है और रिश्तों में प्रेम बना रहता है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, रंग लगाने के संबंध में एक लोक कथा प्रचलित है, ये भगवान श्रीकृष्ण और राधा की लीलाओं से जुड़ी है। कथा है कि एक दिन बालक कृष्ण ने अपनी माता यशोदा से प्रश्न किया था कि राधा का इतनी गौरी क्यों है, उसका रंग मुझसे इतना अलग क्यों हैं? माता यशोदा ने मजाक में कान्हा जी को सलाह दी कि वे राधा को अपने मनपसंद रंग में रंग दें। माता की सलाह मानकर कान्हा ने राधा को रंग लगाया था। बाद में यही प्रसंग एक-दूसरे को रंग लगाने की परंपरा का आधार बना। जब कृष्ण ने राधा के मुख पर रंग लगाया और राधा ने भी उन्हें रंगों से सराबोर किया, तब ब्रज में उल्लास की लहर दौड़ गई। लोगों ने इसे प्रेम का प्रतीक मानते हुए एक-दूसरे को रंग लगाना शुरू कर दिया। इसी वजह से आज भी मथुरा, गोकुल, बरसाना और वृंदावन में होली कई दिनों तक मनाई जाती है। यहां लठमार होली, फूलों की होली और रंगोत्सव देखने देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। यहां के मंदिरों में विशेष श्रृंगार किया जाता है। भक्त पहले ठाकुर जी को रंग चढ़ाते हैं और फिर एक-दूसरे के साथ उत्सव मनाते हैं। पं. शर्मा का कहना है कि रंगों का ज्योतिष में भी गहरा महत्व बताया गया है। ग्रहों और राशियों के अनुसार अलग-अलग रंगों के रत्न धारण करने की सलाह दी जाती है। होली पर यदि व्यक्ति अपनी राशि के अनुसार भगवान रंग चढ़ाता है, तो कुंडली के ग्रह दोष शांत हो सकते हैं। जानिए इस दिन राशि अनुसार अपने इष्टदेव को कौन से रंग चढ़ा सकते हैं…
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.