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दिल्ली हाई कोर्ट ने आज 25 अगस्त को आशीर्वाद आटे का लाइसेंस रद्द करने के FSSAI के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह मामला ITC के ‘आशीर्वाद एमपी चक्की आटा’ की पैकिंग से जुड़ा है। ITC अपने पैकेट और प्रमोशन में 100% आटा जैसे लेबल का इस्तेमाल कर रहा था। FSSAI का मानना है कि ऐसे लेबल का इस्तेमाल उसकी मई 2025 की एडवाइजरी के नियमों के खिलाफ है।
सवाल 1. दिल्ली हाईकोर्ट ने ITC लिमिटेड को क्या और क्यों राहत दी है?
जबाव: दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वरना कांता शर्मा ने FSSAI को निर्देश दिया है कि वह ITC लिमिटेड के फूड बिजनेस लाइसेंस को रद्द करने के संबंध में फिलहाल कोई भी फैसला न ले। ITC ने कोर्ट को बताया था कि FSSAI के 13 अगस्त को जारी किए गए इम्प्रूवमेंट नोटिस के पालन की अंतिम तारीख 28 अगस्त को खत्म हो रही थी। अगर कोर्ट से राहत नहीं मिलती तो कंपनी के लाइसेंस पर तलवार लटक सकती थी। इसलिए कोर्ट ने 28 अगस्त से पहले ही अंतरिम संरक्षण दे दिया।
सवाल 2. यह पूरा विवाद किस उत्पाद और किन दावों से जुड़ा है?
जवाब: यह मामला ITC के प्रमुख उत्पाद ‘आशीर्वाद एमपी चक्की आटा’ की पैकिंग और उसके विज्ञापनों से जुड़ा है। ITC अपने पैकेट और प्रमोशन में तीन मुख्य दावे करता है:
- 100% आटा
- 100% मध्य प्रदेश गेहूं
- 0% मैदा
FSSAI का मानना है कि ‘100%’ जैसे शब्दों का लेबल पर इस्तेमाल उसकी मई 2025 की एडवाइजरी के नियमों के खिलाफ है।

सवाल 3. FSSAI की एडवाइजरी क्या कहती है, जिसके आधार पर यह कार्रवाई हुई?
जबाव: FSSAI ने मई 2025 में एक एडवाइजरी जारी की थी। इसमें खाद्य कंपनियों को उत्पाद के लेबल, पैकेजिंग और प्रचार सामग्री में “100%” शब्द का इस्तेमाल बंद करने के लिए कहा गया था। FSSAI का तर्क है कि ऐसे दावे उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकते हैं।
सवाल 4. FSSAI ने ITC को नोटिस देने में क्या प्रक्रिया अपनाई?
जवाब: FSSAI ने सबसे पहले 10 अगस्त को ITC को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया। इसमें 30 दिनों के भीतर जवाब मांगा। हालांकि, इसके महज 3 दिन बाद ही 13 अगस्त को FSSAI की क्षेत्रीय अथॉरिटी ने एक ‘इम्प्रूवमेंट नोटिस’ जारी किया और ITC को अनुपालन के लिए 15 दिन का समय दिया।
सवाल 5. कोर्ट में ITC ने FSSAI की इस कार्रवाई के खिलाफ क्या तर्क दिए?
जवाब: ITC ने वरिष्ठ वकील संदीप सेठी के माध्यम से कोर्ट में मुख्य रूप से तीन तर्क दिए:
प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन: कारण बताओ नोटिस का जवाब देने के लिए 30 दिन दिए गए थे, लेकिन उससे पहले ही 15 दिन की समय सीमा वाला इम्प्रूवमेंट नोटिस जारी कर दिया गया।
एडवाइजरी की वैधता पर सवाल: ITC का कहना है कि FSSAI केवल एक एडवाइजरी के जरिए कोई बाध्यकारी प्रतिबंध लागू नहीं कर सकता। कानूनन नियम बनाने के लिए पूर्व प्रकाशन, केंद्र सरकार की मंजूरी का पालन करना जरूरी होता है, जो नहीं किया गया।
उत्पाद की गुणवत्ता पर कोई आरोप नहीं: FSSAI ने यह आरोप कहीं नहीं लगाया है कि आटे में मैदा मिला है, या मध्य प्रदेश के बाहर का गेहूं इस्तेमाल हुआ है।
सवाल 6. सुनवाई के दौरान FSSAI ने क्या आपत्तियां और दलीलें पेश कीं?
जवाब: FSSAI ने याचिका की पोषणीयता पर सवाल उठाया। FSSAI का कहना था कि:
इम्प्रूवमेंट नोटिस कोलकाता स्थित रीजनल अथॉरिटी की ओर जारी किया गया था, इसलिए मामला दिल्ली हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।
खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 (FSS Act) की धारा 32(4) के तहत ITC को पहले ‘फूड सेफ्टी कमिश्नर’ के पास वैधानिक अपील दर्ज करनी चाहिए थी।
सवाल 7. क्षेत्राधिकार के सवाल पर ITC ने क्या जवाब दिया?
जवाब: ITC ने धारा 10(5) का हवाला देते हुए तर्क दिया कि यह मामला एक केंद्रीय लाइसेंस से संबंधित है। सेंट्रल लाइसेंसिंग अथॉरिटी के मामलों में FSSAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) ही फूड सेफ्टी कमिश्नर की शक्तियों का इस्तेमाल करते हैं। चूंकि FSSAI के CEO का मुख्यालय दिल्ली में है, इसलिए मामले की सुनवाई का अधिकार क्षेत्र दिल्ली हाईकोर्ट के पास बनता है।
सवाल 8. इस मामले में अब आगे क्या होगा?
जवाब: दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि वह पहले यह तय करेगा कि क्या उसके पास इस याचिका पर विचार करने का क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र है या नहीं। कोर्ट ने दोनों पक्षों को अधिकार क्षेत्र के सवाल पर संक्षिप्त नोट्स दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 9 सितंबर को होगी। तब तक FSSAI लाइसेंस रद्द करने जैसा कोई सख्त कदम नहीं उठा सकता।
सवाल 9. कानूनी टीम में कौन-कौन शामिल हैं?
जवाब: अदालत में ITC लिमिटेड का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ वकील संदीप सेठी ने किया। उनके साथ वकील रोहित शर्मा, निखिल पुरोहित, जतिन लालवानी, कृष्णा गंभीर और श्रेया सेठी भी कोर्ट में मौजूद थे।
सवाल 10. फूड पैकेट्स पर ‘100%’ का नियम क्या है?
जवाब: FSSAI के अनुसार, पैकेज्ड फूड पर “100% प्योर”, “100% नेचुरल” या “0% मैदा” जैसे दावे उपभोक्ताओं में यह भ्रम पैदा कर सकते हैं कि अन्य प्रतिस्पर्धी ब्रांड्स मिलावटी हैं। नियामक चाहता है कि कंपनियां केवल प्रमाणित और सटीक तकनीकी शब्दों का ही उपयोग करें।
धारा 32 क्या है?
खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2006 की धारा 32 के तहत खाद्य सुरक्षा अधिकारी किसी सुधार की जरूरत महसूस होने पर ‘इम्प्रूवमेंट नोटिस’ जारी करते हैं। इसके खिलाफ कमिश्नर ऑफ फूड सेफ्टी के समक्ष अपील की जा सकती है।
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