दिल्ली हाई कोर्ट ने फिल्म ‘काला हिरण: द बैटल फॉर लेगेसी’ के टीजर को सोशल मीडिया से हटाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि अगर प्रोड्यूसर 24 घंटे के अंदर टीजर के लिंक नहीं हटाते हैं, तो एक्स (ट्विटर) और यूट्यूब जैसी इंटरनेट कंपनियों को इसे हटाने के आदेश दिए जाएंगे। अभिनेता सलमान खान ने अपने पर्सनालिटी राइट्स और निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार की सुरक्षा के लिए याचिका दायर की थी। सलमान का आरोप है कि फिल्म में उन्हें अंडरवर्ल्ड से जुड़ा दिखाकर उनकी छवि खराब की जा रही है। ‘कानून से ऊपर कोई नहीं’- प्रोड्यूसर के रवैये पर कोर्ट नाराज
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस ज्योति सिंह ने फिल्म के प्रोड्यूसर अमित जानी के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि आरोपी हर दिन अपनी सीमाएं पार कर रहा है और खुद को कानून से ऊपर समझ रहा है। जज ने टिप्पणी की कि किसी सामान्य नागरिक के साथ भी ऐसा बर्ताव नहीं किया जा सकता। साख बनाने में बहुत मेहनत लगती है और एक बार छवि खराब होने के बाद उसे वापस पाना आसान नहीं होता। सलमान का आरोप- ब्रेसलेट और शक्ल दिखाकर भ्रम फैलाया
सलमान खान के पक्ष के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि 29 मई को जारी हुए टीजर में एक किरदार को सलमान जैसी शक्ल और उनका मशहूर ब्रेसलेट पहनाकर दिखाया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि फिल्म सलमान खान और 1998 के काला हिरण केस पर आधारित है। सलमान की ओर से बताया गया कि उन्होंने पहले प्रोड्यूसर को लीगल नोटिस भेजा था, लेकिन अमित जानी ने एक इंटरव्यू में उस नोटिस को फाड़ दिया और इंटरनेट पर धमकियां मिलने का दावा करने लगे। प्रोड्यूसर की दलील- किसी का नाम इस्तेमाल नहीं हुआ
सुनवाई के दौरान प्रोड्यूसर अमित जानी के वकील ने पक्ष रखते हुए कहा कि फिल्म में सलमान खान का नाम कहीं इस्तेमाल नहीं हुआ है। टीजर में किसी एआई (AI) या डीपफेक तकनीक का प्रयोग भी नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक टीजर है और सार्वजनिक घटनाओं पर फिल्म बनाने से किसी के पर्सनल राइट्स का हनन नहीं होता। हालांकि, कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि मामला अदालत में लंबित रहने के दौरान ऐसी चीजें सार्वजनिक करना अवमानना के दायरे में आता है। 1998 से जुड़ा है काला हिरण शिकार का मामला
साल 1998 में फिल्म ‘हम साथ-साथ हैं’ की शूटिंग के दौरान राजस्थान में काले हिरण के शिकार का मामला दर्ज हुआ था। सलमान के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि इस मामले से जुड़े चार केसों में से तीन में वे बरी हो चुके हैं, जबकि एक केस में मिली सजा पर अभी राजस्थान हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अपील पेंडिंग है। ऐसे में फिल्म के जरिए किसी समुदाय को भड़काने की कोशिश हो रही है, जिससे निष्पक्ष ट्रायल के अधिकार पर बुरा असर पड़ सकता है।
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.