दिल्ली उच्च न्यायालय ने हॉकी इंडिया के महासचिव भोलानाथ सिंह को जानबूझकर उसके आदेश की अवहेलना करने के लिए अदालत की अवमानना का दोषी ठहराया है।
न्यायमूर्ति पुरुषेन्द्र कुमार कौरव ने कहा कि वह चार मई को सजा के मुद्दे पर सुनवाई करेंगे, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने भोलानाथ सिंह को ‘उचित समझे जाने वाले उपाय’ करके अवमानना को ‘सुधारने’ की स्वतंत्रता दी।
अदालत ने हॉकी इंडिया की निर्वाचित उपाध्यक्ष सईद असीमा अली द्वारा दायर अवमानना से संबंधित याचिका पर 20 अप्रैल को फैसला सुनाया। उन्होंने अपनी इस याचिका पर हॉकी इंडिया के अधिकारियों द्वारा 17 जनवरी, 2025 को पारित आदेश का पालन नहीं करने का आरोप लगाया था।
अदालत ने कहा कि उसके निर्देशों के अनुसार हॉकी इंडिया के अधिकारियों को याचिकाकर्ता को वे जरूरी लिंक उपलब्ध कराने थे जिससे कि वह कार्यकारी बोर्ड की सभी बैठकों में भाग ले सकें, लेकिन चार जुलाई, 2025 और 27 जुलाई, 2025 को आयोजित बैठकों के लिए ऐसा नहीं किया गया।
इसमें पाया गया कि कथित तौर पर बाद की किसी भी घटना से अधिकारियों को याचिकाकर्ता को लिंक प्रदान करने के अपने दायित्व से छूट नहीं मिलती, जबकि उन्होंने निर्देश में संशोधन की मांग भी नहीं की थी।
अदालत ने अपने फैसले में कहा, ‘‘अवमानना को दूर करने का कोई प्रयास नहीं किया गया।’’
इसमें कहा गया है, ‘‘बिना शर्त माफी तो दूर की बात है, माफी का एक शब्द भी नहीं बोला गया। वैसे भी बिना शर्त माफी भी प्रतिवादियों, विशेष रूप से भोलानाथ सिंह को, अदालत के निर्देशों की जानबूझकर, सुनियोजित और स्वेच्छा से की गई अवहेलना से गंगा के पवित्र जल की तरह शुद्ध नहीं कर सकती।’’
अदालत ने माना कि हॉकी इंडिया और सिंह ने वर्तमान कार्यवाही के दौरान जिस तरह से व्यवहार किया, वह अदालत की अवमानना का स्पष्ट मामला है।
अदालत ने कहा कि सरकार के अधीन काम करने वाले और सरकार से धनराशि प्राप्त करने वाले राष्ट्रीय खेल महासंघ का अदालत के आदेशों का पालन न करना ‘‘प्रशासनिक पाप’’ से कम नहीं है।
फैसले में कहा गया है, ‘‘यह अदालत प्रतिवादियों, विशेष रूप से हॉकी इंडिया के महासचिव भोलानाथ सिंह को 17 जनवरी 2025 के आदेश का जानबूझकर उल्लंघन करने/पालन न करने के लिए अदालत की अवमानना का दोषी पाती है।’’
अली ने भोलानाथ सिंह को हॉकी इंडिया के महासचिव पद से हटाने के लिए याचिका दायर की थी जिस पर 17 जनवरी 2025 को आदेश पारित किया गया था।
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