असफलता कई बार दीपक बघेल के बेहद करीब पहुंची, लेकिन उन्होंने कभी उसे अपनी पहचान नहीं बनने दिया। UPSC सिविल सेवा परीक्षा में उन्होंने लगातार दो बार इंटरव्यू तक का सफर तय किया, लेकिन अंतिम चयन सूची में जगह नहीं बना सके।
कौन हैं दीपक बघेल
दीपक बघेल मध्य प्रदेश के चंबल इलाके में भिंड के रहने वाले हैं। आर्मी में नायब सूबेदार रह चुके जगपाल सिंह के बेटे दीपक बघेल ने ग्वालियर से स्कूली शिक्षा और जीवाजी यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन पूरा किया। दीपक का बचपन से सिविल सर्वेंट बनने का कोई इरादा नहीं था। 12वीं के बाद उन्होंने सर्विस सिलेक्शन बोर्ड की कठिन परीक्षा क्रैक की और उनका चयन इंडियन नेवी के लिए हो गया था। लेकिन परिस्थितियों के कारण वे नेवी जॉइन नहीं कर सके और 2022 में उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू की।
तैयारी का सफर और लगातार दो झटके
उन्होंने पूरे समर्पण के साथ पढ़ाई की और 2023 में अपने पहले प्रयास में प्रीलिम्स और मेन्स दोनों चरण सफलतापूर्वक पास कर पर्सनैलिटी टेस्ट (इंटरव्यू) तक पहुंचे। हालांकि, अंतिम चयन सूची में उनका नाम शामिल नहीं हो सका। इसके बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और दोबारा परीक्षा दी। दूसरे प्रयास में भी वे इंटरव्यू तक पहुंचे, लेकिन इस बार भी अंतिम मेरिट सूची में जगह बनाने से चूक गए। लगातार दो बार इतने करीब पहुंचकर भी सफलता न मिलने के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया और तैयारी जारी रखी।
खुद को दिया एक और मौका दिया
लगातार दो बार इंटरव्यू तक पहुंचकर भी अंतिम चयन सूची में जगह न बना पाना किसी भी उम्मीदवार का हौसला तोड़ सकता था। लेकिन दीपक बघेल ने हार मानने के बजाय खुद को एक और मौका देने का फैसला किया। उन्होंने कुछ समय निकालकर अपनी तैयारी का गहराई से विश्लेषण किया, अपनी कमियों को पहचाना और पूरी रणनीति को नए सिरे से तैयार किया।
आईपीएस अधिकारी का मिला मार्गदर्शन
इसी दौरान उन्हें IPS अधिकारी अभिजीत चौधरी का मार्गदर्शन मिला। उनकी सलाह पर दीपक ने सिर्फ ज्यादा घंटे पढ़ने के बजाय स्मार्ट तरीके से और बेहतर गुणवत्ता के साथ पढ़ाई पर ध्यान देना शुरू किया। यही रणनीति में किया गया बदलाव उनकी सफलता की सबसे बड़ी वजह बना और आखिरकार उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 में AIR 602 हासिल कर अपना सपना साकार कर लिया।
रणनीति में किया बदलाव
लगातार मिली असफलताओं के बाद दीपक बघेल ने अपनी तैयारी के तरीके में बड़ा बदलाव किया। उन्होंने जवाबों को जरूरत से ज्यादा जटिल बनाने के बजाय सरल, स्पष्ट और मौलिक तरीके से लिखने पर ध्यान दिया। उनका मानना है कि यही बदलाव उनकी तैयारी में सबसे प्रभावी साबित हुआ और इससे उनके प्रदर्शन में काफी सुधार आया। दीपक ने अपनी पूरी तैयारी ग्वालियर से की। शुरुआत में उन्हें लगता था कि अगर वे दिल्ली में रहकर तैयारी करते, तो शायद उन्हें अधिक फायदा मिलता। लेकिन समय के साथ उन्होंने समझा कि सफलता किसी शहर पर नहीं, बल्कि निरंतर मेहनत, सही रणनीति और खुद पर भरोसे पर निर्भर करती है।
अपने अनुभव साझा करते हुए दीपक कहते हैं, “आपके पास तैयारी करने की वजह (Why) बहुत बड़ी होनी चाहिए, क्योंकि UPSC का यह सफर पूरी तरह अनिश्चितताओं से भरा होता है।” उनकी कहानी इस बात का उदाहरण है कि असफलता सफलता का अंत नहीं, बल्कि उसी तक पहुंचने का एक महत्वपूर्ण पड़ाव होती है।
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