अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन में आज दो महाशक्तियों के बीच बड़ी बैठक होने जा रही है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग अमेरिका पहुंच चुके हैं। जिनपिंग का ये दौरा 11 साल के बाद हो रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रोटोकॉल तोड़कर खुद जॉइंट बेस एंड्रयूज एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति शी जिनपिंग स्वागत किया। राष्ट्रपति शी जिनपिंग अपनी पत्नी पेंग लियुआन का हाथ पकड़े हुए जब विमान से नीचे उतरे तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी पत्नी मेलानिया ट्रंप के साथ उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। शी जिनपिंग के स्वागत में करीब 100 फीट लंबा रेड कारपेट बिछाया गया और दो B-1 बॉम्बर विमानों ने आसमान से दोनों नेताओं को सलामी दी। साथ ही दोनों देशों के राष्ट्रगान के बीच अमेरिकी सेना के 479 सैनिकों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया।
अमेरिका चीन के बीच इन मुद्दों पर होगी बात
वहीं, आज ट्रंप और जिनपिंग के बीच अहम द्विपक्षीय वार्ता होगी। इस दौरान 5 अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। इनमें ट्रेड, टैरिफ, AI, ताइवान को लेकर जारी तनाव, ईरान युद्ध और रूस से तेल खरीद का मुद्दा शामिल है। वहीं, राष्ट्रपति शी जिनपिंग के स्वागत में आज राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप व्हाइट हाउस के स्टेट फ्लोर पर विशेष समारोह का आयोजन करेंगे। साथ ही आज रात व्हाइट हाउस में शी जिनपिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन के सम्मान में राजकीय भोज होगा।
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा-:
अमेरिका और चीन दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं… अमेरिका और चीन के पास शायद दुनिया की दो सबसे ताकतवर सेनाएं हैं। अमेरिका और चीन के बीच के रिश्ते ही 21वीं सदी की दिशा तय करेंगे.. इन रिश्तों में क्या होता है? यह सोचना कि हम उनसे सबसे ऊंचे स्तर पर बातचीत नहीं करेंगे, गैर-ज़िम्मेदाराना है। यह बहुत गलत बात है। हमें ऐसा करना ही होगा। इसका मतलब यह नहीं है कि हमारे बीच गहरे मतभेद नहीं हैं। बेशक हैं। लेकिन कोल्ड वॉर के चरम पर भी, यहां तक कि परमाणु तबाही और धरती पर जीवन खत्म होने के खतरे के बीच भी, अमेरिका रूसी और सोवियत अधिकारियों के साथ अक्सर बातचीत और बैठकें करता था और शुक्र है कि हमने ऐसा किया, क्योंकि इससे एक असली युद्ध टल गया।
इसलिए मुझे लगता है कि सबसे ऊंचे स्तर पर बातचीत करना हमारी ज़िम्मेदारी है। और मुझे लगता है कि यह दौरा इसी बात को दिखाता है.. राष्ट्रपति का मानना है कि चीनी सरकार के साथ हमारे मतभेद और अंतर चाहे जो भी हों… चीन कोई छोटा-मोटा देश नहीं है। यह दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और इसके पास एक बहुत बड़ी सेना है जो शायद इतिहास में सबसे तेज़ी से अपनी सैन्य ताकत बढ़ा रही है…. और हां, एक ऐसा देश जिसके साथ व्यापार, सप्लाई चेन, ज़रूरी मिनरल्स और ऐसी ही चीज़ों को लेकर हमारे बीच गहरे मतभेद भी हैं… इसलिए, मुझे लगता है कि हमारे नेताओं का एक-दूसरे से बात करना और मिलना एक ज़िम्मेदार कूटनीति है, और हम इसे इसी नज़रिए से देखते हैं,
इसी नज़रिए से हम इस दौरे को देखते हैं। हमने चीन का दौरा किया था, उन्होंने इस साल की शुरुआत में हमारी मेज़बानी की थी। समझौते का एक हिस्सा यह था कि हम वहां जाएंगे, वे यहां आएंगे, और यह उसी समझौते का अगला चरण है, और इस साल के आखिर में उन्हें फिर से बातचीत करने का मौका मिल सकता है – चीन में एशिया-पैसिफिक इकोनॉमिक कोऑपरेशन और G20 में….
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