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CSIS की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के कैरियर पनडुब्बी हमलों के प्रति बहुत ज़्यादा असुरक्षित हैं। समुद्र के नीचे, चीन के विरोधी देश जैसे अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के पास एडवांस्ड पनडुब्बी बेड़े हैं, जो बिना पकड़े गए कैरियर ग्रुप्स पर हमला करने में सक्षम हैं। वे कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के करीब जाकर ज़बरदस्त असर वाले टॉरपीडो या क्रूज़ मिसाइल दाग सकते हैं। ऐसा तब भी हो सकता है जब डिस्ट्रॉयर, फ्रिगेट और एयरक्राफ्ट जैसी कई परतों वाली सुरक्षा मौजूद हो। अमेरिकी नौसेना भी इस कमज़ोरी का सामना कर रही है, क्योंकि उसके कैरियर लंबे समय से चीन की पनडुब्बियों और मिसाइलों के मुख्य निशाने रहे हैं।
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पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (PLAN) कागज़ पर तो अपने प्रतिद्वंद्वियों से आगे निकल गई है उसके पास ज़्यादा हल (hulls), बड़े डेक और नए एयरक्राफ्ट हैं। लेकिन एंटी-सबमरीन वॉरफेयर (पनडुब्बी-रोधी युद्ध) के मामले में स्थिति अलग है। रिपोर्ट में दुश्मन की पनडुब्बियों—खासकर पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में घूम रही अमेरिकी अटैक सबमरीन—का पता लगाने और उन्हें ट्रैक करने की चीन की क्षमता में लगातार कमियों की ओर इशारा किया गया है। पानी के नीचे की यह ‘ब्लाइंड स्पॉट’ (अदृश्यता) वाली स्थिति अब पहले से कहीं ज़्यादा अहम हो गई है। CSIS की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन अपनी ताकत का प्रदर्शन करना चाहता है और जैसे-जैसे उसकी क्षमता बढ़ेगी, वह अपने कैरियर को अपने तटों से दूर ले जाएगा। चीन इन जहाजों को ‘पहली द्वीप श्रृंखला’ (first island chain) से आगे और ‘दूसरी द्वीप श्रृंखला’ की ओर ले जा रहा है, ताकि प्रशांत महासागर के अंदरूनी हिस्सों और उससे आगे तक अपनी ताकत का प्रदर्शन कर सके। उदाहरण के लिए, जापान ने बीजिंग के बढ़ते प्रभाव को लेकर पहले ही चेतावनी दे दी है और अपनी रक्षा क्षमताओं को बेहतर बना रहा है।
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