आजकल देर रात सोना काफी कॉमन हो गया है। लेकिन बच्चा अगर छोटा है और रात 10बजे के बाद सो रहा है, तो इसका उसके ब्रेन और बॉडी पर असर पड़ सकता है। चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट ने इस बारे में विस्तार में बताया है, जो पेरेंट्स को जरूर जानना चाहिए।
रात 10 बजे के बाद सोने पर क्या होता है?
अगर बच्चा रोज देर से सोता है, तो इसका असर सिर्फ अगले दिन की थकान तक ही सीमित नहीं होता। बल्कि उसकी ग्रोथ पर भी पड़ता है। डॉ. मिमांसा के मुताबिक, बच्चे के शरीर में ग्रोथ हार्मोन नींद के दौरान एक्टिव होते हैं। ये हड्डियों और शरीर की ग्रोथ में इंपॉर्टेंट रोल प्ले करते हैं। अच्छी नींद बच्चे के मूड, मेमोरी और लर्निंग कैपेसिटी के लिए भी जरूरी हैं। इसलिए बच्चे के लिए सिर्फ यह देखना जरूरी नहीं है कि वह कितने घंटे सो रहा है, बल्कि उसके सोने की रूटीन भी रेगुलर होना चाहिए।
बच्चे के सोने का समय तय करें
बच्चे के लिए सोने और जागने का एक तय समय रखने की कोशिश करें। अगर आप चाहते हैं कि बच्चा रात 9 बजे तक सो जाए, तो उसके बेडटाइम रूटीन की शुरुआत करीब 8 बजे से कर दें। इससे बच्चे को अचानक खेलने या टीवी देखने से उठाकर बिस्तर पर भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी। डॉ. मिमांसा के अनुसार, हर रात एक जैसा रूटीन रखना काफी हेल्पफुल हो सकता है। जैसे नहाना, नाइट ड्रेस पहनना, दांत साफ करना, टॉयलेट जाना, कहानी सुनना, थोड़ी देर प्यार से बात करना और फिर बिस्तर पर जाना। जब यही क्रम रोज दोहराया जाता है, तो बच्चे को धीरे-धीरे समझ आने लगता है कि अब सोने का समय है।
शाम की नींद पर रखें ध्यान
कई बार बच्चे शाम को सो जाते हैं और फिर रात में उन्हें जल्दी नींद नहीं आती। डॉ. मिमांसा सलाह देती हैं कि कोशिश करें कि बच्चा शाम के समय, खासकर दोपहर 3 बजे के बाद, न सोए। शाम की नींद रात का बेडटाइम आगे कर सकती है। अगर बच्चा शाम को थका हुआ रहता है, तो उसे हल्की और पीसफुल एक्टिविटी में बिजी रखने की कोशिश करें, ताकि रात के समय वह आसानी से सो सके।
सोने से पहले मोबाइल और टीवी बंद करें
बच्चे को जल्दी सुलाना है तो बेडटाइम से पहले स्क्रीन का इस्तेमाल कम करना जरूरी है। कोशिश करें कि सोने से करीब एक से दो घंटे पहले मोबाइल, टीवी और दूसरी स्क्रीन बंद कर दी जाएं। इस समय बच्चे को कहानी सुनाएं, उसके साथ थोड़ी देर बैठें या दिनभर की बातें करें। सोने से पहले का समय जितना शांत और आराम वाला होगा, बच्चे के लिए बेडटाइम के लिए तैयार होना उतना आसान हो सकता है।
दिन में बच्चे को एक्टिव रखें
बच्चे की दिनभर की एक्टिविटी का असर उसकी रात की नींद पर भी पड़ सकता है। इसलिए उसे दिन में खेलने और फिजिकल एक्टिविटी करने का पर्याप्त मौका दें। बाहर खेलना और दिन में एक्टिव रहना रात तक नींद आने में मदद कर सकता है। हालांकि, सोने से ठीक पहले बहुत ज्यादा उत्साह वाली एक्टिविटी न रखें। बेडटाइम के करीब आते-आते माहौल को धीरे-धीरे शांत करना बेहतर रहेगा।
सोने से पहले घर का माहौल शांत रखें
बच्चे के बेडटाइम के करीब घर में बहुत ज्यादा शोर या भागदौड़ न हो, इसका ध्यान रखें। रोशनी थोड़ी कम कर दें और तेज आवाज में टीवी या दूसरी एक्टिविटी से बचें। सोने से पहले बच्चे से भी शांत तरीके से बात करें। रोज का एक जैसा और शांत माहौल बच्चे के लिए एक संकेत बन सकता है कि अब खेलने का नहीं, सोने का समय है।
बच्चे को जल्दी सुलाने के लिए आपको जल्दी सोना जरूरी नहीं
अगर आपका बच्चा रात 9 बजे सोता है, तो यह जरूरी नहीं कि आप भी उसी समय सोएं। आप बच्चे के लिए अलग बेडटाइम रूटीन बना सकते हैं और उसके बाद अपनी रूटीन जारी रख सकते हैं। अगर बच्चे को देर रात तक जागने की आदत है, तो शुरुआत में वह जल्दी बिस्तर पर जाने में आनाकानी कर सकता है। ऐसे में परेशान होने के बजाय धैर्य रखें और हर दिन एक जैसा रूटीन बनाए रखें।
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