Pullout method risk of pregnancy: कपल्स अगर पुलआउट मेथड का इस्तेमाल अनचाही प्रेग्नेंसी को रोकने के लिए करते हैं तो सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि इस मेथड के फेल होने के चांस सबसे ज्यादा हैं। डॉक्टर से समझें कैसे?
डॉक्टर से जानें आखिर क्यों?
गायनी शिल्पा चौहान ने वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किया है। जिसमे एक महिला अपनी प्रेग्नेंसी रिपोर्ट को देखकर बताती है कि ये कैसे हो सकता है जबकि उनके पति पुलआउट मेथड का यूज करते हैं। इस पर डॉक्टर ने बताया कि गर्भनिरोध का ये तरीका ज्यादातर फेल हो जाता है क्योंकि इजैकुलेशन से पहले निकलने वाले फ्लूइड में कई बार स्पर्म मौजूद होते हैं जो वजाइना में आसानी से पहुंच जाते हैं और प्रेग्नेंसी के चांस बढ़ जाते हैं।
कुछ कपल्स के बीच इस मेथड का यूज करने के दौरान कुछ बूंदे स्पर्म की अंदर चली जाती हैं और प्रेग्नेंसी हो जाती है।
डॉक्टर ने बताया कि हर गर्भनिरोध पूरी तरह से काम की नहीं होती। कुछ परसेंट फेलियर रेट हर गर्भनिरोध प्रोसेस में होते हैं। इसलिए पुलआउट मेथड भी पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है और इसमे प्रेग्नेंसी के चांस भी बाकी गर्भनिरोधक की तुलना में ज्यादा होते हैं।
क्या कहती है रिपोर्ट
मायो क्लीनिक की रिपोर्ट के मुताबिक पुलआउट मेथड के फेल होने के चांस बाकी गर्भनिरोध की तुलना में ज्यादा होते हैं। अनुमान है कि एक साल तक अगर कपल इस विधि का यूज करता है तो पांच में से एक कपल के प्रेग्नेंसी के चांस होते हैं। इसका कारण दो हो सकता है। मायो क्लीनिक के मुताबिक अगर सेल्फ कंट्रोल नहीं है और समय पर स्पर्म बाहर नहीं निकलता तो प्रेग्नेंट होने का परसेंट बढ़ जाता है। वहीं कई बार प्री इजैकुलेशन फ्लूइड में मौजूद स्पर्म प्रेग्नेंसी के कारण बनते हैं।
पुलआउट मेथड सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिसीज और इंफेक्शन के खतरे को भी बढ़ा देता है। इसलिए गर्भनिरोध के लिए इस मेथड का यूज करना अनवांटेड प्रेग्नेंसी के चांस को सबसे ज्यादा बढ़ा देता है।
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