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14 मार्च को ट्रंप ने अपने प्लेटफार्म ट्रुथ सोशल पर अपनी तरफ से लिख दिया कि होमूस बंद करने से प्रभावित देश अमेरिका के साथ अपने युद्धपोत भेजेंगे। हमने पहले ही ईरान की 100% सैन्य क्षमताओं को ध्वस्त कर दिया। लेकिन वो अभी भी होर्मुज पर ड्रोन या कोई माइन या मिसाइल छोड़ सकता है। उम्मीद है चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और दूसरे देश इस इलाके में अपने युद्धपोत भेजेंगे। बाद में बिना किसी देश का नाम लेते हुए ट्रंप ने अपने विमान एयरफोर्स वन पर कहा, “मैंने सात देशों से मांग की है कि होर्मुज की सुरक्षा के लिए बने गठबंधन में शामिल हो जाइए और अपनी टेरिटरी की रक्षा कीजिए। दो हफ्ते से ट्रंप कई बार दावा कर चुके हैं। ईरान को हरा दिया। इसके बाद भी दुश्मन के समंदर में पांव रखने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे। दो दिनों से ट्रंप अपील कर रहे हैं। अभी तक किसी देश ने अपने युद्धपोत भेजने का वादा नहीं किया।
जापान ने किया साफ मना
जापान डोनाल्ड ट्रंप के अनुरोध को ठुकरा चुका है। जापान का कहना है कि वह समुद्री सुरक्षा अभियानों पर ‘विचार नहीं कर रहा है’ जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दूसरे देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा में मदद के लिए युद्धपोत भेजने का आह्वान किया था। जापानी प्रधानमंत्री के हवाले से एएफपी ने कहा है कि ‘जापान को अभी तक अमेरिका से होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षा के लिए अपनी नौसेना भेजने का कोई अनुरोध नहीं मिला है इसलिए इस पर जवाब देना मुश्किल है। रॉयटर्स के मुताबिक ताकाइची ने संसद को बताया है कि ‘हमने सुरक्षा जहाज भेजने के बारे में अभी तक कोई भी फैसला नहीं किया है।
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दक्षिण कोरिया अभी कर रहा बात
ऑस्ट्रेलिया और जापान ने जहां होर्मुज में सेना भेजने से साफ इनकार कर दिया है वहीं दक्षिण कोरिया ने कहा है कि वो ‘विचार-विमर्श’ कर रहा है। दक्षिण कोरिया ने अमेरिका से बातचीत करने की भी बात कही है। सियोल स्थित दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति कार्यालय ने बताया है कि ‘कोई भी कदम उठाने से पहले स्थिति की पूरी और सावधानीपूर्वक समीक्षा की जाएगी।
ऑस्ट्रेलिया नौसेना का जहाज नहीं भेजेगा
ऑस्ट्रेलिया का कहना है कि ट्रंप के अनुरोध के बाद भी वह होर्मुज़ जलडमरूमध्य में नौसेना का जहाज नहीं भेजेगा। ऑस्ट्रेलिया ने पुष्टि कर दी है कि वह इस क्षेत्र को नौसैनिक सहायता नहीं देगा। ऑस्ट्रेलिया के कैबिनेट मंत्री कैथरीन किंग ने ABC को बताया है कि हालांकि यह जलमार्ग बहुत महत्वपूर्ण है लेकिन कैनबरा को कोई औपचारिक अनुरोध नहीं मिला है
नाटो को ट्रंप की धमकी
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने लगभग सात देशों से युद्धपोत भेजने की मांग की है, ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखा जा सके। बहरहाल, ईरान युद्ध के बीच तेल की कीमतों में तेजी के बावजूद उनकी अपील पर अभी तक किसी देश ने ठोस प्रतिबद्धता नहीं जतायी है। ट्रंप ने उन देशों के नाम बताने से इनकार कर दिया, जो पश्चिम एशिया के कच्चे तेल पर काफी हद तक निर्भर हैं और जिनसे अमेरिकी प्रशासन इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा के लिए एक गठबंधन बनाने को लेकर बातचीत कर रहा है। इस जलमार्ग से दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का व्यापारिक तेल गुजरता है। ट्रंप ने कहा कि मैं इन देशों से मांग कर रहा हूं कि वे आगे आएं और अपने क्षेत्र की सुरक्षा करें क्योंकि यह उनका ही क्षेत्र है। उन्होंने फ्लोरिडा से वाशिंगटन लौटते समय एयर फोर्स वन विमान में पत्रकारों से बातचीत में यह भी दावा किया कि यह समुद्री मार्ग अमेरिका के लिए उतना जरूरी नहीं है, क्योंकि अमेरिका के पास तेल तक अपनी पहुंच है। ट्रंप ने कहा कि चीन को लगभग 90 प्रतिशत तेल इसी मार्ग से मिलता है, जबकि अमेरिका को वहां से बहुत कम तेल मिलता है। हालांकि उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया कि क्या चीन इस गठबंधन में शामिल होगा। इससे पहले ट्रंप चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन से इसमें शामिल होने की अपील कर चुके हैं।
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