आज मुस्कान ठाकुर की सफलता बिहार के हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। उनका सफर यह संदेश देता है कि किसी भी बड़ी परीक्षा में एक-दो या कई असफलताओं के बाद भी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए।
कौन है मुस्कान
मुस्कान ठाकुर का परिवार बिहार के बेगूसराय जिले के समसा पंचायत के वार्ड संख्या-10 से आता है। उनके पिता जितेंद्र ठाकुर गृह मंत्रालय में कार्यरत हैं। वहीं, उनके भाई मोहित ठाकुर भी एक प्रतिष्ठित पद पर हैं। उनके चाचा सुबोध ठाकुर मंसूरचक के उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में किरानी हैं, जबकि दादा करमचंद ठाकुर ने वर्षों तक गांव में लेथम मशीन चलाकर परिवार का पालन-पोषण किया।
पढ़ाई-लिखाई
जैसे कि मुस्कान के पिता जितेंद्र ठाकुर दिल्ली के गृह मंत्रालय में कार्यरत हैं, तो एनडीटीवी में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक मुस्कान का जन्म और पालन-पोषण दिल्ली में हुआ। शुरुआती शिक्षा से लेकर स्कूली पढ़ाई तक सब कुछ दिल्ली में ही हुआ। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज से इकोनॉमिक्स (ऑनर्स) में ग्रेजुएशन किया।
कॉलेज जीवन के दौरान वह हिंदू कॉलेज की पार्लियामेंट से भी जुड़ी रहीं। लगातार दो सालों तक सचिव और मंत्री की जिम्मेदारी निभाने के दौरान शासन, नीति-निर्माण और प्रशासन से जुड़े विषयों में उनकी रुचि बढ़ती गई। यहीं से उनके भीतर सिविल सेवा में जाने का सपना आकार लेने लगा। मुस्कान की मेहनत रंग लाई और उन्होंने BPSC 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा में पहले ही प्रयास में 252वीं रैंक हासिल कर प्रशासनिक सेवा में जगह बना ली। उनकी सफलता ने यह साबित कर दिया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो असफलताएं भी सफलता की सीढ़ी बन जाती हैं।
कैसे की तैयारी
मुस्कान ठाकुर अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय अनुशासन और निरंतरता को देती हैं। तैयारी के दौरान वह रोज सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक लाइब्रेरी में पढ़ाई करती थीं। उन्होंने हर दिन अलग-अलग विषयों के लिए समय तय किया और करेंट अफेयर्स को भी एक विषय की तरह पढ़ा। मेंस की तैयारी के लिए नियमित मॉक टेस्ट दिए, जिससे उनकी आंसर राइटिंग बेहतर हुई।
UPSC में 3 बार असफल, फिर भी नहीं मानी हार
BPSC उनका पहला प्रयास था, लेकिन इससे पहले वह UPSC की परीक्षा तीन बार दे चुकी थीं। एक बार मेंस तक पहुंचीं, लेकिन अंतिम चयन नहीं हुआ। लगातार असफलताओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी, अपनी गलतियों से सीखा और नई रणनीति के साथ तैयारी जारी रखी।
परिवार का मिला पूरा सहयोग
मुस्कान बताती हैं कि उनके पिता ने मेहनत करना सिखाया, मां ने हमेशा लक्ष्य पर केंद्रित रहने की प्रेरणा दी और उनकी भाभी ने करियर को लेकर लगातार उत्साहित किया। मुश्किल समय में दोस्तों का साथ भी उनके लिए बड़ी ताकत बना।
अखबार, नोट्स और रिवीजन पर रहा फोकस
तैयारी के दौरान वह रोज अखबार पढ़ती थीं, छोटे-छोटे नोट्स बनाती थीं और बार-बार उनका रिवीजन करती थीं। उनका मानना है कि सीमित संसाधनों के साथ लगातार अभ्यास करना ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है।
युवाओं के लिए प्रेरणा
आज मुस्कान ठाकुर की सफलता बिहार के हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। उनका सफर यह संदेश देता है कि किसी भी बड़ी परीक्षा में एक-दो या कई असफलताओं के बाद भी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। सही रणनीति, निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
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