केरल के 16 वर्षीय राउल जॉन ने अपने पिता को 2 लाख रुपये प्रति माह सैलरी की नौकरी पर रखा हुआ है। वह एआई टीचर, डेवलपर, उद्यमी और लेक्चरर बन चुके हैं।
पिता को ही क्यों बनाया कर्मचारी
राउल के पिता अजू जोसेफ को कॉरपोरेट वर्ल्ड का अच्छा खास अनुभव है। वह अमेजन, एडोबी, विप्रो और IBM जैसी बड़ी कंपनियों में काम कर चुके हैं। अब वह अपने बेटे की कंपनी में काम करते हैं।
पिता को कंपनी में शामिल करने के सवाल पर राउल ने कहा कि वह फोन से जितना चाहें उतना ज्ञान हासिल कर सकते हैं, लेकिन उनके पिता के पास जो प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस है, वह उनके पास नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि पिता के अमेजन, एडोबी, विप्रो और IBM जैसी कंपनियों में काम करने का अनुभव उन्हें काफी कुछ सीखने में मदद करता है। साथ ही उनके अनुसार यह मार्केटिंग के लिहाज से भी अच्छा फैसला था।
AI की आसान पढ़ाई उपलब्ध करा रहे
राउल अपने टैलेंट से स्टार्टअप AI Technologies, ThinkCraft Academy शुरू कर चुके हैं। इसके जरिए IIT, IIM, विदेशी विश्वविद्यालयों और कॉरपोरेट संस्थानों से जुड़े छात्र और पेशेवर AI की ट्रेनिंग लेते हैं। राउल का मानना है कि AI को डरावना या बेहद कठिन विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। इसे कंप्यूटर साइंस की डिग्री या वर्षों की तकनीकी ट्रेनिंग के बिना भी समझा जा सकता है। ThinkCraft Academy के जरिए उन्होंने दुनियाभर में करीब 5 लाख छात्रों को ट्रेनिंग दी है।
AI टूल्स जो असली समस्याओं को हल करते हैं
राउल ने जो 15 AI टूल्स बनाए हैं, उनमें से RESQ AI अपने मकसद के लिए सबसे अलग है। उन्होंने UN न्यूज को बताया, “अगर आप किसी इमरजेंसी सिचुएशन में हैं, तो यह टूल आपको बताएगा कि क्या करना है और कौन से कानून लागू होते हैं। यह आपको एक वकील से जोड़ेगा और वकील को हज़ारों ऐसे ही केस देखकर केस जीतने की स्ट्रेटेजी बनाने में भी मदद करेगा।” दूसरे टूल्स में MeBot, ZapGap, Investo AI, और FeedFye शामिल हैं, जिनमें से हर एक को सिर्फ टेक्निकल क्षमता दिखाने के लिए नहीं बल्कि असल दुनिया की खास जरूरतों के हिसाब से डिजाइन किया गया है।
AI डरावना नहीं होना चाहिए
राउल कहते हैं कि AI डरावना नहीं होना चाहिए। इसे समझने के लिए कंप्यूटर साइंस की डिग्री या सालों की टेक्निकल ट्रेनिंग की जरूरत नहीं होनी चाहिए। यह गांवों में स्टूडेंट्स, ऑफिस में प्रोफेशनल्स और जो कोई भी सीखना चाहता है, उसके लिए आसान होना चाहिए। थिंकक्राफ्ट के जरिए राउल ने दुनिया भर में लगभग पांच लाख स्टूडेंट्स को ट्रेन किया है। इसकी पहुंच सच में ग्लोबल है, जिसमें दुनिया भर के दूर-दराज के कर्मचारी केरल के एक घर से शुरू हुए एक वेंचर में योगदान दे रहे हैं।
पथानामथिट्टा से UN तक
राउल की कामयाबियों की वजह से उन्हें बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों में बोलने का मौका मिला है और नई दिल्ली में 2026 में होने वाले इंडिया AI समिट समेत इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में बुलाया गया है। उन्हें वर्ल्ड एजुकेशन मेडल्स 2025 के फाइनलिस्ट के तौर पर भी चुना गया है। यह HP का शुरू किया गया एक ग्लोबल कॉम्पिटिशन है, जिसका मकसद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके एजुकेशन को बदलने और सीखने की कमियों को दूर करने के लिए किए जा रहे नए कामों को सामने लाना है।
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