पंकज उधास के पिता, केशुभाई उधास, सरकारी कर्मचारी थे, और उन्हें संगीत का बहुत शौक था. उनकी मां, जीतूबेन उधास, भी गायिकी की शौकीन थीं. पंकज के दो बड़े भाई, मनहर और निर्जल उधास, पहले से ही गायक थे. परिवार में संगीत का माहौल होने की वजह से पंकज बचपन से ही संगीत में रुचि लेने लगे.
10 साल की उम्र में दी स्टेज परफॉरर्मेंस
पंकज ने सिर्फ दस साल की उम्र में अपनी पहली स्टेज परफॉर्मेंस दी.उस समय भारत-चीन युद्ध चल रहा था और उन्होंने ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ गीत गाया था. यह गाना उन दिनों देशभक्ति का प्रतीक बन चुका था. उनके गायन से वहां मौजूद सभी लोग भावुक हो गए. एक दर्शक ने उनकी तारीफ में उन्हें 51 रुपए का इनाम दिया. यह छोटा सा इनाम पंकज के लिए किसी बड़े सम्मान से कम नहीं था और इसी ने उनके संगीत के सफर की नींव रखी.
शिक्षा को दी प्राथमिकता
बचपन से ही संगीत में रुचि होने के बावजूद पंकज ने शिक्षा को भी प्राथमिकता दी. उन्होंने मुंबई में एक कॉलेज से बीएससी की डिग्री हासिल की. वहीं, संगीत में उनका प्रशिक्षण भी लगातार चलता रहा. उन्होंने राजकोट की संगीत अकादमी में दाखिला लिया और शुरू में तबला बजाना सीखा, लेकिन बाद में उन्हें उस्ताद गुलाम कादिर खान से हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायिकी सीखने का अवसर मिला. इसके बाद पंकज मुंबई गए और वहां उन्होंने नवरंग नागपुरकर के मार्गदर्शन में संगीत का अभ्यास किया.
ऐसे शुरू हुआ फिल्मी करियर
पंकज का फिल्म करियर 1972 में शुरू हुआ, जब उन्होंने फिल्म ‘कामना’ के गानों में आवाज दी, लेकिन यह फिल्म फ्लॉप रही. इसके बाद वे कुछ समय के लिए विदेश चले गए. विदेश में उन्होंने कई बड़े मंचों पर परफॉर्म किया, और वहां से लौटकर उन्होंने बॉलीवुड और गजल की दुनिया में कदम रखा और 1986 में रिलीज हुई फिल्म ‘नाम’ में ‘चिट्ठी आई है’ गजल गाई, जो बहुत बड़ी हिट साबित हुई.
फिल्मों में ही नहीं, गजल से कमाया नाम
पंकज उधास ने सिर्फ फिल्मों में ही नहीं, बल्कि गज़ल के अलग-अलग एल्बमों में भी नाम कमाया. उनके पहले एल्बम ‘आहट’ (1980) ने उन्हें पहचान दिलाई. इसके बाद उन्होंने कई हिट एल्बम दिए, जिनमें ‘मुकर्रर’, ‘तरन्नुम’, ‘महफिलन’, और ‘आफरीन’ शामिल हैं. उनकी गज़लों में प्यार, रोमांस, और जज़्बातों का शानदार मिश्रण होता था.
2006 में पद्मश्री से सम्मानित
पंकज उधास को उनके योगदान के लिए कई पुरस्कार भी मिले. 2006 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया. उनके संगीत के प्रति समर्पण के लिए उन्हें 2025 में पद्मभूषण से भी नवाजा गया. पंकज उधास का निधन 26 फरवरी 2024 को मुंबई में हुआ. वे 72 वर्ष के थे.
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