5 दिन के बैंकिंग सप्ताह की डिमांड काफी पुरानी है। यूनियनों के मुताबिक 2015 में दूसरे और चौथे शनिवार को छुट्टी घोषित किए जाने के बाद बैंकों में 5 दिन के सप्ताह की दिशा में सहमति बनी थी। बाद में 2020 में इस मुद्दे पर फिर चर्चा हुई और 8 मार्च 2024 के वेतन समझौते में इसे औपचारिक रूप दिया गया। इसके तहत बैंक कर्मचारियों ने सोमवार से शुक्रवार तक रोजाना अतिरिक्त 40 मिनट काम करने पर सहमति जताई थी, ताकि सभी शनिवार को छुट्टी दी जा सके। यूनियनों का कहना है कि इस प्रस्ताव को वित्त मंत्रालय के पास भेजे काफी समय हो चुका है, लेकिन अभी तक सरकार की मंजूरी नहीं मिली है। उनका यह भी कहना है कि RBI, LIC, GIC और NABARD जैसी कई संस्थाओं में पहले से पांच दिन का कार्य सप्ताह लागू है।
दूसरा बड़ा विवाद PLI योजना को लेकर है। यूनियनों के मुताबिक 2020 के समझौते के तहत बैंक कर्मचारियों के लिए एक समान इंसेंटिव व्यवस्था लागू की गई थी। इसमें कर्मचारी से लेकर जनरल मैनेजर तक प्रदर्शन के आधार पर अधिकतम 15 दिनों की सैलरी तक इंसेंटिव मिल सकता था। लेकिन, नवंबर 2024 में वित्तीय सेवा विभाग (Department of Financial Services) ने स्केल IV से VII के अधिकारियों के लिए व्यक्तिगत प्रदर्शन पर आधारित नई व्यवस्था लागू करने का निर्देश दिया। यूनियनों का दावा है कि यह करीब 40,000 अधिकारियों यानी बैंकिंग सेक्टर के लगभग 5% कर्मचारियों को प्रभावित करती है और नई व्यवस्था में उन्हें अधिकतम 365 दिनों की सैलरी के बराबर इंसेंटिव मिल सकता है।
UFBU का आरोप है कि इससे वरिष्ठ अधिकारियों और बाकी कर्मचारियों के बीच बहुत बड़ा अंतर पैदा होगा। यूनियनों ने मार्च 2025 में भी इस मुद्दे पर हड़ताल का आह्वान किया था, जिसे बातचीत के बाद टाल दिया गया था। इसके बावजूद मार्च 2026 में बैंकों को संशोधित फॉर्मूला लागू करने का निर्देश दिया गया। मामला दिल्ली हाईकोर्ट तक भी पहुंच चुका है। यूनियनों का कहना है कि 21 अगस्त 2026 को वित्तीय सेवा विभाग के दोबारा निर्देश के बाद उनके पास आंदोलन तेज करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा। ऐसे में अगर बातचीत के जरिए समाधान नहीं निकलता है, तो सितंबर की हड़ताल के बाद अक्टूबर में अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान बैंकिंग सेवाओं के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.