Budget 2026: निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स 4.4% गिर गया, जबकि बेंचमार्क निफ्टी 50 में करीब 1.4% की गिरावट रही। खास बात यह रही कि रविवार को हुए स्पेशल ट्रेडिंग सेशन में SBI, बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा जैसे बड़े सरकारी बैंकों के शेयर 2% से 7% तक लुढ़क गए।
क्या हुआ है ऐलान
अपने बजट भाषण में वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार “विकसित भारत” के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए बैंकिंग सेक्टर के लिए एक हाई लेवल कमेटी ऑन बैंकिंग बनाएगी। यह कमेटी पूरे बैंकिंग सिस्टम के कामकाज की समीक्षा करेगी और यह देखेगी कि आने वाले समय में, जब देश की अर्थव्यवस्था और ज्यादा बड़ी और टेक्नोलॉजी-आधारित होगी, तब बैंक कैसे खुद को बेहतर बना सकते हैं। उन्होंने यह भी साफ किया कि इस समीक्षा का मकसद सिर्फ मुनाफा नहीं, बल्कि वित्तीय स्थिरता, वित्तीय समावेशन और उपभोक्ताओं की सुरक्षा भी होगा।
वित्त मंत्री कई मौकों पर संकेत दे चुकी हैं
इससे पहले भी वित्त मंत्री कई मौकों पर संकेत दे चुकी हैं कि सरकार दुनिया के स्तर के बड़े भारतीय बैंक बनाना चाहती है। नवंबर में मुंबई में हुए SBI बैंकिंग एंड इकोनॉमिक्स कॉन्क्लेव में उन्होंने कहा था कि सरकार RBI और बैंकिंग सेक्टर से जुड़े लोगों के साथ मिलकर सरकारी बैंकों के कंसॉलिडेशन (विलय) पर चर्चा कर रही है। दिसंबर में एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि FY27 तक सरकारी बैंकों की संख्या 12 से घटाकर 4 की जा सकती है। हालांकि बाद में सरकार ने साफ कर दिया कि तुरंत किसी विलय का फैसला नहीं लिया गया है।
इस बीच, बजट में सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ₹17.2 लाख करोड़ के बाजार से कर्ज का लक्ष्य रखा है, जो मौजूदा साल से करीब 16% ज्यादा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ज्यादा उधारी का बोझ बैंकों पर पड़ सकता है, खासकर सरकारी बैंकों पर। अशिका स्टॉक ब्रोकिंग के BFSI एनालिस्ट अशुतोष मिश्रा के मुताबिक, ज्यादा कर्ज लेने की स्थिति में बैंकों को सरकार को ज्यादा पैसा देना पड़ता है और SLR का दबाव आमतौर पर PSU बैंकों पर ही ज्यादा पड़ता है। यही वजह है कि बाजार फिलहाल सरकारी बैंकों को लेकर थोड़ा सतर्क नजर आ रहा है।
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.