दिल्ली आबकारी नीति (Excise Policy) मामले में कानूनी लड़ाई अब एक दिलचस्प मोड़ पर पहुँच गई है। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल आज दिल्ली हाई कोर्ट में खुद अपनी दलीलें पेश करेंगे। इसके साथ ही, केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने इस मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच पर अविश्वास जताते हुए खुद को इस मामले से अलग करने (Recusal) की अर्जी दाखिल की है।
कोर्ट रूम में खुद मोर्चा संभालेंगे केजरीवाल
आम आदमी पार्टी की कानूनी टीम के मुताबिक, केजरीवाल आज व्यक्तिगत रूप से अदालत के सामने पेश होंगे। यह पहली बार नहीं है जब केजरीवाल खुद अपनी पैरवी कर रहे हैं, लेकिन सीबीआई (CBI) द्वारा उन्हें बरी किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर उनकी दलीलें काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा पर आपत्ति
केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से संपर्क कर इस मामले को जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच से किसी दूसरी अदालत में स्थानांतरित करने की मांग की है। उनकी टीम का तर्क है कि न्याय के हित में इस मामले की सुनवाई किसी अन्य बेंच द्वारा की जानी चाहिए।
इसे भी पढ़ें: Kerala में कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge का विवादित बयान!’अनपढ़ गुजराती’ वाली टिप्पणी पर भड़की BJP, कहा- ‘गुजरात माफ़ नहीं करेगा’
इस बीच, प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका से जुड़ी कार्यवाही में, केजरीवाल और सिसोदिया को अपना जवाब दाखिल करने के लिए पखवाड़े भर से ज़्यादा का अतिरिक्त समय दिया गया है। हाई कोर्ट ने उन्हें 22 अप्रैल, 2026 तक अपना जवाब दाखिल करने का आखिरी मौका दिया है।
ED की याचिका उन “गैर-ज़रूरी टिप्पणियों” को हटाने से जुड़ी है, जिन्हें उसने विशेष CBI-ED कोर्ट द्वारा जांच एजेंसियों के खिलाफ की गई टिप्पणियां बताया है। अपनी अर्जी में, ED ने दलील दी कि निचली अदालत की टिप्पणियां CBI मामले से असंगत थीं और एजेंसी को सुने बिना की गई थीं। उसने आगे तर्क दिया कि ये टिप्पणियां प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करती हैं और इससे उसकी विश्वसनीयता को अपूरणीय क्षति पहुंची है।
हाई कोर्ट ने यह चेतावनी भी दी है कि उसके नोटिस का जवाब न देने पर इस मामले में प्रतिवादियों के अधिकारों में कटौती की जा सकती है। इस मामले में अगली सुनवाई 22 अप्रैल को होनी है।
इससे पहले, विशेष CBI-ED कोर्ट ने पर्याप्त सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य को बरी कर दिया था; इस फैसले को CBI ने हाई कोर्ट में चुनौती दी है।
इसे भी पढ़ें: Donald Trump की ‘सब कुछ उड़ा देने’ की धमकी से भड़का Iran, विनाशकारी जवाबी कार्रवाई की दी चेतावनी
इसके अलावा, केजरीवाल और सिसोदिया ने हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से संपर्क कर इस मामले को जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच से किसी दूसरी अदालत में स्थानांतरित करने की मांग की थी।
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.