दलीप ट्रॉफी 2026 में वेस्ट जोन पर जीत के बाद अर्शदीप सिंह की जुबां पर दिल की बात आई है। वह रेड-बॉल क्रिकेट में अपनी वापसी का पूरा आनंद ले रहे हैं। तेज गेंदबाज अर्शदीप नॉर्थ जोन का हिस्सा हैं।
‘मुझे बहुत कम ऐसा चांस मिलता है’
मैच के बाद अर्शदीप ने कहा, “मुझे बहुत कम मौकों पर लाल गेंद की क्रिकेट खेलने का चांस मिलता है। मैं अपनी स्किल्स दिखाना चाहता था और यह देखना चाहता था कि मैं कितने ओवर गेंदबाजी कर सकता हूं। लय अच्छी महसूस हो रही है। काफी समय बाद लाल गेंद के साथ मैच खेला। मैंने अभ्यास में काफी घंटे लगाए थे और अच्छा लगा। शरीर में दर्द है, लेकिन यह अच्छा दर्द है क्योंकि हम मैच जीत गए।” क्रिकेट के सबसे बड़े फॉर्मेट में वापसी करने के लिए अर्शदीप ने अपनी तैयारियों में काफी समय बिताया और जब मैदान पर उतरे तो इसके लिए तैयार भी दिखे। उनका मानना है कि लाल गेंद के क्रिकेट में वापसी के काफी मौके मिलते हैं और यही उन्हें सबसे ज्यादा पसंद है।
‘रेड-बॉल क्रिकेट की खूबसूरती है कि…’
उन्होंने कहा, “(लाल या सफेद गेंद से अभ्यास करने का फै़सला) इस बात पर निर्भर करता है कि आगे क्या आने वाला है। इस बार मुझे पता था कि दलीप ट्रॉफी आने वाली है, इसलिए मैं लाल गेंद से अभ्यास कर रहा था। जब सीमित ओवर क्रिकेट का सीजन आता है तो आप सफेद गेंद से अभ्यास करते हैं। ट्रेनिंग पूरी तरह इस बात पर निर्भर करती है कि आपके सामने किस तरह का सीजन आने वाला है।” उन्होंने कहा, “हमारे मुख्य कोच अजय शर्मा ने मुझसे कहा था कि ‘अगर नई गेंद से विकेट नहीं भी मिले तो दूसरे स्पेल में वापसी का मौका रहेगा।’ रेड-बॉल क्रिकेट की खूबसूरती यही है कि यह आपको दोबारा मौका देता है।” अर्शदीप ने 2023 में केंट के लिए काउंटी चैंपियनशिप के पांच मैच खेले थे। बीसीसीआई की ओर से उन्हें यही संदेश मिला है कि लाल गेंद की क्रिकेट में जहां भी मौका मिले, प्रदर्शन करो और “जब सही समय आएगा, तुम्हें मौक़ा मिलेगा।”
‘ऐसी पिच पर दिमाग से खेलना पड़ता है’
अर्शदीप ने कहा, “जब भी मौका मिले और समय हो कि आप वहां (इंग्लैंड जाकर काउंटी क्रिकेट) खेल सकें, तो वह बहुत अच्छा अनुभव होता है। लेकिन अब आईपीएल, घरेलू सीमित ओवर के सीज़न और घरेलू क्रिकेट के चलते वहां जाकर खेलना आसान नहीं है। यहां भी महत्वपूर्ण मैच खेले जा रहे होते हैं। हम अपने घरेलू क्रिकेट को भी आगे बढ़ाना चाहते हैं और यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उसका स्तर नीचे न जाए। इसलिए हम यहां खेलना चुनते हैं और अपना सर्वश्रेष्ठ देते हैं।” वेस्ट जोन के खिलाफ उन्हें बादलों से ढकी परिस्थितियां जरूर मिलीं, लेकिन बेंगलुरु और इंग्लैंड की परिस्थितियों में समानता वहीं समाप्त हो गई। लाल मिट्टी की पिच ने स्पिनरों को अधिक मदद दी और अर्शदीप को अपनी रणनीति में बदलाव करना पड़ा। उन्होंने कहा, “ऐसी पिच पर आपको दिमाग से खेलना पड़ता है। कभी सफलता मिलती है, कभी सामने वाला बल्लेबाज़ आपके ख़िलाफ़ बड़ा शॉट खेल देता है। आपको दोनों चीजें स्वीकार करनी होती हैं और लगातार कोशिश करते रहना होता है।”
‘मैं मुशीर के दिमाग से खेलना चाहता था’
उन्होंने ऐसा किया भी और पहली पारी में मुशीर खान का विकेट शानदार तरीके से हासिल किया। मुशीर 125 गेंदों पर 31 रन बनाकर डटे हुए थे। तब अर्शदीप ने राउंड द विकेट आकर ऑफ साइड पर करीबी फील्ड सजाई। वहां वाइड स्लिप, गली, शॉर्ट मिडऑफ, शॉर्ट कवर और थोड़ा पीछे कवर मौजूद था। इतने दबाव भरे दृश्य के बीच उन्होंने पटकी हुई गेंद फेंकी, अतिरिक्त उछाल हासिल की और मुशीर को कैच आउट कराया। अर्शदीप ने कहा, “उस पिच में तेज गेंदबाजों के लिए कुछ भी नहीं था। पूरी तरह स्पिनरों का दबदबा था। मैं बस मुशीर के दिमाग से खेलना चाहता था। वह बहुत रक्षात्मक बल्लेबाजी कर रहा था, इसलिए हम चाहते थे कि फील्डर उसकी आंखों के सामने रहें और उसे लगे कि हम कुछ अलग करने वाले हैं। लेकिन हम लगातार एक ही लाइन और लेंथ पर गेंदबाजी करते रहे और उसने एक गेंद पर हमें मौका दे दिया।”
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