विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर रविवार को भामला फाउंडेशन के विमेन-लेड ग्रीन मोबिलिटी प्रोग्राम के तहत पिंक ई-रिक्शा सहायता पहल की शुरुआत की गई। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस ने ई-रिक्शा चलाया। वहीं, रिक्शा में उनके पीछे बॉलीवुड एक्ट्रेस भूमि पेडनेकर बैठी थीं। देखें कार्यक्रम की 2 तस्वीरें- भूमि ने पिंक ई-रिक्शा पहल की तारीफ की मीडिया से बातचीत करते हुए भूमि ने कार्यक्रम को लेकर कहा कि यह सिर्फ पर्यावरण से जुड़ी पहल नहीं है, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा, सशक्तिकरण और आर्थिक आजादी को भी बढ़ावा देने वाला कदम है। एक्ट्रेस ने कहा कि जब भामला फाउंडेशन ने उन्हें इस पहल के बारे में बताया, तो उन्होंने तुरंत इसका हिस्सा बनने की इच्छा जताई। उन्होंने कहा कि इसके तहत महिला ड्राइवरों को ई-रिक्शा दिए जाएंगे, जिससे उन्हें रोजगार और आर्थिक मजबूती मिलेगी। भूमि ने कहा कि अगर देश की महिलाएं सक्षम होंगी तो देश और तेजी से आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण की बातें तो अक्सर होती हैं, लेकिन भामला फाउंडेशन ने इसे जमीन पर उतारकर दिखाया है। मुंबई में 1000 ई-रिक्शा लॉन्च होंगे भूमि ने उम्मीद जताई कि पिंक ई-रिक्शा की यह पहल पूरे देश में फैलेगी। उन्होंने बताया कि मुंबई में 1000 पिंक ई-रिक्शा लॉन्च किए जा रहे हैं, जबकि महाराष्ट्र में 12 हजार ई-रिक्शा शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। भामला फाउंडेशन मुंबई की एक गैर-सरकारी संस्था (एनजीओ) है। इसकी शुरुआत साल 1995 में आसिफ भामला ने की थी। शुरुआत में यह संस्था सामाजिक और राष्ट्रीय एकता से जुड़े मुद्दों पर काम करती थी। बाद में इसने अपने काम का दायरा बढ़ाया। आज यह संस्था पर्यावरण बचाने, स्वास्थ्य जागरूकता फैलाने, युवाओं को आगे बढ़ाने और महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कई अभियान चलाती है। वर्कफ्रंट की बात करें तो भूमि पेडनेकर आखिरी बार अमेजन प्राइम की वेब सीरीज ‘दलदल’ में नजर आई थीं। इस सीरीज में उन्होंने डीसीपी रीटा फरेरा का किरदार निभाया था। भूमि पेडनेकर से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… संघर्ष, ट्रॉमा-रिजेक्शन से उठकर स्ट्रॉन्ग एक्ट्रेस बनीं भूमि पेडनेकर:बोलीं- स्कूल में बुलिंग होती थी, तभी सोचा कि एक दिन सबको कुछ बनकर दिखाऊंगी संघर्ष, ट्रॉमा, रिजेक्शन और सामाजिक तानों के बीच खुद को साबित करने वाली अभिनेत्री का नाम है भूमि पेडनेकर। मुंबई की चमकदार फिल्म इंडस्ट्री में पहचान बनाना आसान नहीं होता, खासकर तब जब शुरुआत आत्म-संदेह, असुरक्षा और निजी आघातों से भरी हो। पूरी खबर यहां पढ़ें…
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