अमेरिकी डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लुमेंथल ने भारत और चीन को रूस से तेल और गैस न खरीदने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि उन्हें “अपना तेल और गैस कहीं और से खरीदना चाहिए और तुष्टिकरण कोई रणनीति नहीं है। उनका यह बयान तब आया है जब अमेरिकी हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स ने एक बिल पास किया है, जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कुछ खास हालात में रूसी ऊर्जा के बड़े खरीदारों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की इजाज़त देगा। यह कानून सीनेट से पास हो चुका है और अब ट्रंप के पास जाएगा। अगर इस पर कानून के तौर पर दस्तखत हो जाते हैं, तो भारत पर 100% तक टैरिफ लग सकता है। ब्लुमेनथल ने यूक्रेन को मज़बूत आर्थिक और सैन्य मदद देने का भी समर्थन किया और कहा कि इस कदम का मकसद यूक्रेन में युद्ध को लेकर रूस पर दबाव बढ़ाना है।
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पिछले महीने सीनेट से बिल पास होने के बाद, हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स ने बुधवार को 159 के मुकाबले 262 वोटों से इसे मंज़ूरी दी और ट्रंप के पास भेज दिया। इस कदम का मकसद उन देशों को सज़ा देकर रूस की यूक्रेन में चल रही जंग के लिए फंड जुटाने वाली एनर्जी से होने वाली कमाई को रोकना है, जो रूस से तेल और गैस खरीदते हैं। 2022 में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के यूक्रेन पर हमला करने के बाद से भारत रूस की एनर्जी का सबसे बड़ा खरीदार रहा है। ब्लूमेंथल ने कहा चीन और भारत से: बेहतर होगा कि आप अपना रवैया सुधारें। अपना तेल और गैस कहीं और से खरीदें। तुष्टीकरण कोई रणनीति नहीं है। इस बिल का आधिकारिक नाम ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ़ 2026’ है। इसके तहत ईरान के एनर्जी और हथियारों के सेक्टर पर लगे प्रतिबंधों की अवधि को भी पांच साल के लिए बढ़ा दिया गया है।
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बिल की आलोचना करने वालों का कहना है कि इससे राष्ट्रपति के हाथों में बहुत ज़्यादा ताकत आ जाती है। भले ही कई लोग यूक्रेन को मदद देने और रूस के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने का समर्थन करते हैं, फिर भी 152 सांसदों ने इस बिल का विरोध किया। हालांकि, बिल का समर्थन करने वालों का कहना है कि यह बिल साफ़ तौर पर उन देशों पर नए टैरिफ़ लगाता है जो रूस से एनर्जी खरीदते हैं और प्रतिबंधों से बचने में मदद करते हैं। कई बार सार्वजनिक रूप से पुतिन को अपना दोस्त बताने के बावजूद, ट्रंप ने बार-बार संकेत दिया है कि वे इस बिल पर हस्ताक्षर करके इसे कानून बना देंगे।
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