टाटा समूह की एयरलाइन कंपनी एयर इंडिया ने पिछले तीन साल में नैतिकता संबंधी मुद्दों के उल्लंघन के मामलों में 1,000 से अधिक कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त की हैं।
कंपनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एवं प्रबंध निदेशक कैंपबेल विल्सन ने शुक्रवार को कर्मचारियों के साथ आयोजित टाउनहॉल बैठक में कहा कि हर वर्ष सैकड़ों कर्मचारियों को नियमों के उल्लंघन के कारण हटाया जाता है। उन्होंने कर्मचारियों से सही आचरण बनाए रखने की अपील भी की।
सूत्रों के अनुसार, विल्सन ने कहा कि हटाए गए कर्मचारियों में ऐसे लोग भी शामिल हैं जिन्होंने विमान से सामान की तस्करी की या अतिरिक्त सामान को बिना शुल्क विमान में ले जाने की अनुमति दी। उन्होंने कर्मचारी अवकाश यात्रा प्रणाली (ईएलटी) के दुरुपयोग का भी उल्लेख किया।
सूत्रों ने मार्च में बताया था कि एयर इंडिया ने अपनी अवकाश यात्रा नीति के उपयोग में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं पकड़ी थीं, जिनमें 4,000 से अधिक कर्मचारी शामिल पाए गए।
कंपनी ने दोषी कर्मचारियों पर जुर्माना लगाने समेत सुधारात्मक कदम उठाए हैं।
वर्तमान में एयर इंडिया के पास लगभग 24,000 कर्मचारी हैं। कंपनी वित्तीय दबावों के बीच लागत में कटौती के उपाय भी कर रही है। इसके तहत वार्षिक वेतन वृद्धि रोकी गई है तथा कर्मचारियों को गैर-जरूरी खर्चों में कटौती करने को कहा गया है।
विल्सन ने कर्मचारियों से कहा कि यदि पश्चिम एशिया की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो चालू वर्ष कंपनी के लिए ‘‘बहुत कठिन’’ हो सकता है।
एयर इंडिया समूह — जिसमें एयर इंडिया एक्सप्रेस भी शामिल है — को मार्च, 2026 में समाप्त वित्त वर्ष में 22,000 करोड़ रुपये से अधिक का घाटा होने का अनुमान है।
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