पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद प्रमुख आभूषण कंपनी टाइटन कंपनी ने कहा है कि उसे अल्पकालिक अवधि में सोने की आपूर्ति को लेकर कोई चिंता नहीं है, क्योंकि उसका ‘गोल्ड एक्सचेंज कार्यक्रम’ और वैकल्पिक आपूर्ति योजनाएं जोखिम को कम करने में मदद कर रही हैं।
कंपनी का वित्त वर्ष 2025-26 में कुल कारोबार 75,000 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। कंपनी ने कहा कि उसका गोल्ड एक्सचेंज कार्यक्रम तीसरी तिमाही से सफलतापूर्वक चल रहा है और इससे आभूषण कारोबार के लिए सोने की उपलब्धता में लचीलापन बढ़ा है।
कंपनी के मुख्य वित्त अधिकारी (सीएफओ) अशोक सोनथालिया ने सोने की आपूर्ति को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा, “हमारा गोल्ड एक्सचेंज कार्यक्रम पिछले वर्ष की तीसरी तिमाही से बहुत सफलतापूर्वक चल रहा है। पहले भी यह कार्यक्रम था, लेकिन अब इसे और मजबूत किया गया है।”
उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो कंपनी इस कार्यक्रम को और बढ़ा सकती है तथा अन्य वैकल्पिक योजनाएं भी तैयार हैं।
सोनथालिया ने कहा, “कम से कम अल्पकालिक अवधि में हमें टाइटन, तनिष्क और कैरटलेन के लिए सोने की आपूर्ति को लेकर कोई चिंता नहीं है।”
उद्योग का एक बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से सोने का आयात करता है। इस बीच, सरकार द्वारा आयात लाइसेंस के नवीनीकरण में देरी की खबरें भी सामने आई थीं।
सोनथालिया ने कहा कि सीमा शुल्क मोर्चे पर कुछ सुस्ती थी, लेकिन अब स्थिति सुधर रही है।
उन्होंने कहा कि अल्पकालिक अवधि में सोना गिरवी रखकर कर्ज लेने (गोल्ड लोन) की लागत बढ़ने की संभावना भी नहीं है, क्योंकि ऋण अवधि 180 दिन से बढ़ाकर 270 दिन कर दी गई है।
कंपनी के आभूषण प्रभाग के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अरुण नारायण ने कहा कि अब एक्सचेंज अभियान को विशेष रूप से तनिष्क के लिए स्वतंत्र रूप से चलाया जा रहा है।
नारायण ने कहा कि यह कार्यक्रम खासकर शादी-विवाह के लिए खरीदारी करने वाले ग्राहकों और पुराने आभूषण बदलकर नए डिजाइन लेने वाले उपभोक्ताओं के बीच खरीद बढ़ाने में मदद करता रहेगा।
उन्होंने कहा कि मार्च तिमाही में खरीदारों की संख्या में आठ प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई, जबकि पिछली तिमाही में यह लगभग स्थिर रही थी।
टाइटन के मार्च तिमाही के एकीकृत शुद्ध लाभ में 35.36 प्रतिशत वृद्धि हुई है और यह 1,179 करोड़ रुपये रहा है। कंपनी की बिक्री भी 48.28 प्रतिशत बढ़कर 20,607 करोड़ रुपये पर पहुंच गई है।
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