अंग्रेजी समाचारपत्र द टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने एक बैलिस्टिक मिसाइल दागी थी जिसे हरियाणा के सिरसा स्थित वायु क्षेत्र में ही नष्ट कर दिया गया था। इस सफल कार्रवाई का नेतृत्व एयर कमोडोर रोहित कपिल ने किया, जो उस समय सिरसा स्थित 45 विंग के एयर ऑफिसर कमांडिंग थे। यह वायु सेना का एक अग्रिम अड्डा है, जो पाकिस्तान सीमा के काफी निकट स्थित है। एयर कमोडोर कपिल और उनकी टीम ने बाराक आठ सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली का उपयोग करते हुए दुश्मन की मिसाइल को बीच आकाश में ही नष्ट कर दिया। माना जा रहा है कि यह मिसाइल फतह या शाहीन द्वितीय श्रेणी की हो सकती थी और इसका संभावित लक्ष्य दिल्ली था।
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इस घटना के बाद 10 मई को सुरक्षा बलों ने सिरसा क्षेत्र से उस मिसाइल के अवशेष भी बरामद किए थे। जमीन पर बिखरे इन हिस्सों के वीडियो भी सामने आए थे, जो इस बात के प्रमाण थे कि किस प्रकार एक बड़े खतरे को समय रहते टाल दिया गया। देखा जाये तो भारतीय वायु सेना की 45 विंग की इस त्वरित और सतर्क कार्रवाई ने न केवल एक बड़े हमले को रोका था बल्कि यह भी सिद्ध कर दिया था कि भारत की एकीकृत वायु रक्षा प्रणाली कितनी प्रभावी है। यही कारण है कि अब सरकार इस प्रणाली को और मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रही है। सुदर्शन कार्यक्रम के तहत एक बहुस्तरीय वायु रक्षा ढांचा तैयार किया जा रहा है, जो पूरे देश में लागू किया जाएगा।
बताया जा रहा है कि इस प्रस्तावित सुदर्शन प्रणाली में मौजूदा और उन्नत तकनीकों का समन्वय किया जाएगा। इसमें रूस से प्राप्त S-400 प्रणाली, Barak-8 MRSAM और स्वदेशी प्रोजेक्ट कुशा इंटरसेप्टर जैसे अत्याधुनिक साधनों को एकीकृत किया जाएगा। इस बहुस्तरीय सुरक्षा कवच का उद्देश्य देश के प्रमुख शहरों, सामरिक ठिकानों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को ड्रोन, क्रूज मिसाइल और अतिध्वनिक खतरों से सुरक्षित करना है।
वैसे उस समय एयर कमोडोर रोहित कपिल और उनकी टीम की इस महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी थी, लेकिन अब यह स्पष्ट हो गया है कि उनकी सतर्कता और तत्परता ने असंख्य लोगों की जान बचाई। हम आपको याद दिला दें कि एयर कमोडोर रोहित कपिल को उनकी इस उत्कृष्ट सेवा और नेतृत्व के लिए पिछले साल 14 अगस्त को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा युद्ध सेवा पदक से सम्मानित किया गया था।
एयर कमोडोर कपिल 20 जून 1998 को एक लड़ाकू पायलट के रूप में वायु सेना में शामिल हुए थे। वह सुखोई तीस एमकेआई विमान के अनुभवी पायलट हैं और श्रेणी ए के योग्य फ्लाइंग प्रशिक्षक भी हैं। इसके अलावा उन्होंने एक परिचालन सुखोई स्क्वॉड्रन का भी नेतृत्व किया है, जो उनके व्यापक अनुभव और दक्षता को दर्शाता है।
उधर, इस पूरे घटनाक्रम के बीच, पहलगाम हमले की बरसी पर भारतीय सेना ने भी पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया। सोशल मीडिया मंच पर जारी एक संदेश में कहा गया कि जब मानवता की सीमाएं पार की जाती हैं, तो प्रतिक्रिया निर्णायक होती है। इस संदेश के साथ भारत के मानचित्र की एक छायाकृति भी साझा की गई, जिस पर लिखा था कि कुछ सीमाएं कभी पार नहीं की जानी चाहिए। वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी पर कहा कि भारत आतंकवाद के किसी भी रूप के आगे कभी नहीं झुकेगा और आतंकवादियों के नापाक इरादे कभी सफल नहीं होंगे। उन्होंने कहा, ‘‘एक राष्ट्र के रूप में हम शोक और संकल्प में एकजुट हैं। भारत आतंकवाद के किसी भी रूप के आगे कभी नहीं झुकेगा। आतंकियों के नापाक इरादे कभी सफल नहीं होंगे।’’
बहरहाल, देखा जाये तो यह पूरा घटनाक्रम न केवल भारत की सैन्य तैयारी और तकनीकी क्षमता को दर्शाता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि देश की सुरक्षा के लिए सतर्कता, समन्वय और त्वरित निर्णय कितने महत्वपूर्ण हैं।
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