बिहार के मोतिहारी के आदर्श कुमार ने कठिन परिस्थितियों से निकलकर इतिहास रचा है। 14 साल की उम्र में 1000 रुपये लेकर निकले आदर्श को अब जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी से 3.5 करोड़ रुपये की 100% स्कॉलरशिप मिली है।
1000 रुपये और एक पुराना लैपटॉप लेकर छोड़ा था घर
आदर्श का बचपन काफी आर्थिक तंगी में बीता। उनकी मां ने अकेले ही उनका पालन-पोषण किया। आदर्श जब 14 साल के थे, तब बेहतर भविष्य की तलाश में सिर्फ 1,000 रुपये और एक पुराना लैपटॉप लेकर कोटा राजस्थान गए। वे वहां कोचिंग में एडमिशन लेना चाहते थे, लेकिन पैसों की कमी के कारण उन्हें दाखिला नहीं मिल सका।
इतनी कम उम्र में इस असफलता से निराश होने के बजाय आदर्श ने खुद का रास्ता खुद बनाने का फैसला किया। उन्होंने इंटरनेट का इस्तेमाल करके तकनीक और एजुकेशन के बारे में सीखना शुरू किया।
स्किलजो की शुरुआत और ग्लोबल पहचान
अपनी मेहनत के दम पर आदर्श ने स्किलजो (Skillzo) नाम का एक प्लेटफॉर्म बनाया। इसका मकसद उन छात्रों को मार्गदर्शन और सही अवसर देना था, जिनके पास संसाधनों की कमी होती है। आज इस पहल से लगभग 20,000 छात्र लाभ उठा चुके हैं। आदर्श की प्रतिभा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली। वे गूगल यूथ एडवाइजर चुने गए। उन्होंने कई एंटरप्रेन्योरशिप कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। साल 2025 में 148 देशों के 11,000 आवेदकों को पीछे छोड़ते हुए वे ग्लोबल स्टूडेंट प्राइज के पहले भारतीय विजेता बने।
22 रिजेक्शन के बाद मिली बड़ी सफलता
जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था। आदर्श को विदेशी यूनिवर्सिटीज से लगातार 22 बार रिजेक्शन का सामना करना पड़ा। एक समय आया जब आवेदन की तारीखें खत्म हो चुकी थीं।
लेकिन सेकंड चांस संस्था की फाउंडर जोन लियू ने आदर्श के हुनर को पहचाना और जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी से उनके आवेदन पर खास विचार करने का अनुरोध किया। यूनिवर्सिटी ने उनकी शानदार प्रोफाइल को देखा और उन्हें 100% फुल स्कॉलरशिप प्रदान की। इस स्कॉलरशिप में उनकी ट्यूशन फीस, रहना, खाना, वीजा, फ्लाइट और स्वास्थ्य बीमा जैसी सभी सुविधाएं शामिल हैं।
ये कोर्स पढ़ने की है इच्छा
जब आदर्श को इस एडमिशन का ईमेल मिला, तब वे अपनी मां के पास ही बैठे थे। उन्होंने सबसे पहले यह खुशखबरी अपनी मां को सुनाई। आदर्श अब जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में पॉलिटिकल साइंस, इकोनॉमिक्स और इंटरनेशनल रिलेशन की पढ़ाई करेंगे। वे बिहार के मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और राज्यपाल से भी मिल चुके हैं। उनका सपना है कि वे ऐसी नीतियां बनाने में योगदान दें, जिससे किसी बच्चे की किस्मत उसके जन्म के हालात तय न करें।
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