आस्था मूल रूप से बिहार के सिवान जिले की रहने वाली हैं। उनकी शुरुआती पढ़ाई सिवान में ही हुई। इसके बाद सातवीं कक्षा में वह दिल्ली-NCR आ गईं। पढ़ाई में शुरू से ही उनका प्रदर्शन शानदार रहा।
सिवान से दिल्ली तक का सफर, पढ़ाई में हमेशा आगे रहीं
आस्था मूल रूप से बिहार के सिवान जिले की रहने वाली हैं। उनकी शुरुआती पढ़ाई सिवान में ही हुई। इसके बाद सातवीं कक्षा में वह दिल्ली-NCR आ गईं। पढ़ाई में शुरू से ही उनका प्रदर्शन शानदार रहा। उन्होंने 10वीं कक्षा में 98 प्रतिशत और 12वीं में 93 प्रतिशत अंक हासिल किए।suc
हायर एजुकेशन
स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के गार्गी कॉलेज से इकोनॉमिक्स और पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया। कोविड-19 महामारी के दौरान उन्हें करीब एक साल बिहार में रहना पड़ा। इसके बाद वह आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली लौट आईं और जामिया मिलिया इस्लामिया से मास्टर्स की डिग्री पूरी की।
परिवार चाहता था डॉक्टर बनें, आस्था ने चुनी सिविल सेवा
आस्था के परिवार की इच्छा थी कि वह डॉक्टर बनें, लेकिन उनके मन में कुछ और ही सपना था। वह सिविल सेवा में जाकर प्रशासनिक अधिकारी बनना चाहती थीं। सिविल सेवा की तैयारी शुरू करने के पीछे उनके शिक्षकों की भी अहम भूमिका रही। एनबीटी में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने बताया कि इकोनॉमिक्स और हिस्ट्री के उनके शिक्षकों के साथ-साथ स्कूल प्रिंसिपल ने भी उन्हें सिविल सेवा की तैयारी के लिए प्रेरित किया। इसी प्रोत्साहन ने उन्हें अपने करियर को लेकर एक अलग दिशा चुनने का आत्मविश्वास दिया।
2022 में शुरू की तैयारी, UPSC के साथ बनाया BPSC को Plan B
आस्था ने साल 2022 में UPSC की तैयारी शुरू की। उन्होंने किसी बड़े कोचिंग संस्थान का सहारा लेने के बजाय सेल्फ स्टडी पर भरोसा किया। उनकी रणनीति स्पष्ट थी कि पहले UPSC के पूरे सिलेबस और बेसिक्स को मजबूत करना और साथ ही BPSC को बैकअप विकल्प के तौर पर तैयार रखना। करीब दो साल तक उन्होंने लगातार अनुशासन और निरंतरता के साथ UPSC की तैयारी की। साल 2023 में उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा का गंभीर प्रयास किया, लेकिन वह प्रीलिम्स परीक्षा पास नहीं कर सकीं।
यह असफलता उनके लिए निराश होने की वजह जरूर थी, लेकिन उन्होंने इसे अपनी मंजिल के रास्ते की रुकावट नहीं बनने दिया। UPSC में सफलता नहीं मिलने के बाद उन्होंने अगले 4-5 महीनों तक पूरी तरह BPSC के सिलेबस पर फोकस किया और आखिरकार पहले ही प्रयास में BPSC परीक्षा में सफलता हासिल कर ली।
बिना कोचिंग के 8-9 घंटे पढ़ाई, सिर्फ एक टेस्ट सीरीज ली
आस्था की तैयारी की सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने बिना कोचिंग के पढ़ाई की। वह रोजाना करीब 8 से 9 घंटे पढ़ाई करती थीं। किताबों के साथ-साथ न्यूजपेपर पढ़ना और नियमित टेस्ट सीरीज के जरिए अपनी तैयारी को परखना उनकी रणनीति का हिस्सा था। उन्होंने प्रैक्टिस के लिए सिर्फ एक टेस्ट सीरीज जॉइन की थी। उनका मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सिर्फ घंटों पढ़ना काफी नहीं है, बल्कि पढ़ाई में निरंतरता, सही रणनीति और अपने प्रदर्शन का नियमित मूल्यांकन भी जरूरी है।
सिविल सेवा की तैयारी के दौरान उन्होंने अपना B.Ed. भी पूरा किया, जिसे उन्होंने बैकअप प्लान के तौर पर रखा था। इस तरह वह पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी और अपने वैकल्पिक करियर विकल्पों के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ती रहीं।
युवाओं को दी Plan B रखने की सलाह
आस्था का मानना है कि मौजूदा प्रतिस्पर्धा और सरकारी परीक्षाओं की अनिश्चितता को देखते हुए अभ्यर्थियों के पास एक Plan B जरूर होना चाहिए। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि मुख्य लक्ष्य से ध्यान भटका दिया जाए। उनका कहना है कि तैयारी के शुरुआती करीब डेढ़ साल में उम्मीदवारों को अपने बेसिक्स और सिलेबस को मजबूत करने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। इसके बाद मेन्स की तैयारी को भी गंभीरता से आगे बढ़ाना चाहिए।
उन्होंने स्टैंडर्ड किताबों से पढ़ाई करने, नियमित न्यूजपेपर पढ़ने और टेस्ट सीरीज के जरिए अपनी तैयारी जांचने की सलाह दी। इसके अलावा उनका मानना है कि पढ़ाई के साथ किसी न किसी हॉबी को भी समय देना चाहिए, ताकि लंबे समय तक तैयारी के दौरान मानसिक संतुलन बना रहे।
BPSC पास कर बनीं ग्रामीण विकास अधिकारी
लगातार मेहनत का नतीजा यह रहा कि आस्था ने BPSC चयन प्रक्रिया के तीनों चरण प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू सफलतापूर्वक पास कर लिए। उनकी विभागीय रैंक 259 रही और उनका चयन बिहार ग्रामीण विकास सेवा (BRDS) के लिए हुआ है। पटना स्थित BPSC कार्यालय में हुए इंटरव्यू में आस्था उस दिन की पहली कैंडिडेट थीं। करीब 17-18 मिनट चले इंटरव्यू में उनके ऑप्शनल विषय और बिहार में जिला स्तर की शिक्षा नीतियों से जुड़े सवाल पूछे गए। चयन के बाद वह शुरुआत में ग्रामीण विकास अधिकारी (RDO) के तौर पर अपनी सेवाएं देंगी। विभागीय प्रशिक्षण और करीब 1-2 साल की सेवा के बाद उन्हें आगे चलकर ब्लॉक विकास अधिकारी (BDO) के पद की जिम्मेदारी मिलने का अवसर मिल सकता है।
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