इस साल होने वाले विश्व कप में अगर कोई खिलाड़ी विरोधी से बात करते समय अपना मुंह ढकता हुआ पाया जाता है, तो उसे सीधे मैदान से बाहर भेजा जा सकता है। बता दें कि यह कदम खेल में पारदर्शिता और अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, यह प्रस्ताव अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल नियम बनाने वाली संस्था इंटरनेशनल फुटबॉल एसोसिएशन बोर्ड की बैठक में सर्वसम्मति से पारित किया गया है। गौरतलब है कि इस नियम को कड़ा करने की जरूरत उस घटना के बाद महसूस की गई, जिसमें रियल मैड्रिड के खिलाड़ी विनीसियस जूनियर ने बेनफिका के जियानलुका प्रेस्टियानी पर नस्लीय टिप्पणी का आरोप लगाया था। उस दौरान प्रेस्टियानी बातचीत करते समय अपना मुंह ढकते हुए नजर आए थे, जिससे विवाद और गहरा गया था।
बताया जा रहा है कि ऐसे मामलों में अब आयोजकों को अधिकार होगा कि वे स्थिति के अनुसार सीधे लाल कार्ड दिखा सकें। इसके अलावा, अगर कोई खिलाड़ी रेफरी के फैसले के विरोध में मैदान छोड़ता है या किसी अधिकारी द्वारा खिलाड़ियों को ऐसा करने के लिए उकसाया जाता है, तो भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ऐसी स्थिति में संबंधित टीम को मैच गंवाना भी पड़ सकता है।
गौरतलब है कि हाल ही में अफ्रीका कप ऑफ नेशंस के फाइनल में भी इसी तरह का विवाद देखने को मिला था, जहां एक टीम के खिलाड़ियों ने पेनल्टी दिए जाने के विरोध में मैदान छोड़ दिया था। बाद में इस घटना ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया और मैच के नतीजे तक पर असर पड़ा था।
फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना है कि यह नया नियम खेल में अनुशासन बनाए रखने और अपमानजनक या भेदभावपूर्ण टिप्पणियों को रोकने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है। हालांकि, कुछ लोग इसे बहुत सख्त भी मान रहे हैं और उनका कहना है कि इससे खिलाड़ियों की स्वाभाविक प्रतिक्रिया पर असर पड़ सकता है।
फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल महासंघ इस नियम को आने वाले विश्व कप में लागू करने की तैयारी में है और माना जा रहा है कि इससे मैदान पर होने वाले विवादों में कमी आ सकती है और खेल की छवि बेहतर बनेगी।
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