एक मां अपने बच्चे के साथ सब कुछ शेयर करती है और करना भी चाहिए। लेकिन क्या आप जानती हैं कुछ ऐसी बातें भी हैं, जिन्हें बच्चे से छिपाना बेहतर होता है। ये बातें बच्चे के दिमाग और दिल पर बुरा असर डाल सकती हैं, जो भविष्य में परेशानी की वजह बन सकता है ।
पति-पत्नी के आपसी झगड़े का जिक्र
पति-पत्नी के बीच मतभेद होना आम बात है। लेकिन कोशिश करें कि इन झगड़ों और आपसी कड़वाहट को बच्चों के सामने न लाएं। खासकर गुस्से में अपने पार्टनर की बुराई बच्चों से करने से बचें। जब बच्चा मां और पिता दोनों से जुड़ा होता है, तो उसे किसी एक के खिलाफ बातें सुनाना उसके लिए मुश्किल सिचुएशन पैदा कर सकता है। वह इमोशनली रूप से खुद को दो हिस्सों में बंटा हुआ फील कर सकता है।
घर की आर्थिक परेशानी का जिक्र
बच्चों को पैसों की अहमियत और सही इस्तेमाल समझाना अच्छी बात है, लेकिन घर में पैसे नहीं हैं, खर्च कैसे चलेगा या कर्ज कैसे चुकाया जाएगा जैसी चिंता उनके सामने बार-बार करना ठीक नहीं है। बच्चा अगर घर की फाइनेंशियल कंडीशन के बारे में सोचने लगेगा तो इससे उसकी पढ़ाई पर फर्क पड़ सकता है। साथ ही बच्चे पर बेवजह का मानसिक दवाब भी पड़ सकता है।
अपनी पुरानी गलतियां बच्चों को ना बताएं
बचपन या जवानी में की गई हर गलती को बच्चों के साथ शेयर करना जरूरी नहीं है। खासकर ऐसी गलतियां, जिन्हें सुनकर बच्चा यह सोचने लगे कि अगर मां ने ऐसा किया था तो मेरे लिए भी वह गलत नहीं होगा। बच्चों को अपने अनुभवों से सीख देना अच्छी बात है, लेकिन यह समझना भी जरूरी है कि कौन-सी बात उनके सामने रखनी है और कौन-सी नहीं।
रिश्तेदारों से अपनी नाराजगी बच्चों के सामने ना जाहिर करें
परिवार में हर रिश्ते में हमेशा सब कुछ अच्छा रहे, यह जरूरी नहीं है। दादा-दादी, चाचा-चाची या ननिहाल के किसी सदस्य से मां की अपनी कोई नाराजगी या अनबन हो सकती है। लेकिन अपनी व्यक्तिगत परेशानी के कारण बच्चे के मन में उन रिश्तेदारों के लिए नफरत पैदा करने से बचना चाहिए। आपकी किसी से नहीं बनती, इसका मतलब यह जरूरी नहीं कि बच्चे का भी उस व्यक्ति के साथ वैसा ही रिश्ता हो।
यह एहसास ना दिलाएं कि बच्चे की वजह से आपने सब कुछ छोड़ दिया
पैरेंट्स अपने बच्चों के लिए अपने करियर या लाइफ प्लान में कई बदलाव करते हैं। लेकिन इस त्याग का एहसास बच्चे को बार-बार कराना सही नहीं है। अगर बच्चे से लगातार कहा जाए कि तुम्हारी वजह से मैंने अपना करियर छोड़ दिया या तुम्हारे लिए अपनी जिंदगी कुर्बान कर दी, तो उसके मन में गिल्ट आ सकता है। उसे लग सकता है कि वह अपने माता-पिता की परेशानियों की वजह है।
बच्चों के बीच तुलना या पक्षपात से बचें
अगर घर में एक से ज्यादा बच्चे हैं, तो मां के लिए जरूरी है कि वह किसी एक बच्चे को दूसरे से ज्यादा प्यार या दुलार न करे। किसी एक की बार-बार तारीफ करना और दूसरे को कम समझना भाई-बहन के रिश्ते में दूरी ला सकता है। खासकर जब बड़े होकर संपत्ति या दूसरी पारिवारिक चीजों को लेकर कोई विवाद होता है, तो पुराने पक्षपात की बातें फिर से सामने आ सकती हैं।
बच्चों के भविष्य को ले कर अपनी घबराहट उन पर ना डालें
बच्चे के भविष्य को लेकर चिंता होना स्वाभाविक है। लेकिन अपनी चिंता को ऐसे शब्दों में बच्चों के सामने न रखें, जिससे उनका खुद पर भरोसा कम होने लगे। उदाहरण के लिए, बार-बार यह कहना कि तुम जिंदगी में कुछ नहीं कर सकते या तुमसे कुछ नहीं होगा, बच्चे के आत्मविश्वास को कमजोर कर सकता है।
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